दुनिया का सबसे महंगा मसाला बना सकता है आपको मालामाल, घर में भी उगाई जा सकती है ये फसल

केसर की खेती (Saffron Farming) IN HINDI | सोना और चांदी जैसा कीमती होता है, केसर, जानिए कैसे कर सकते हैं |केसर भारत में एक प्रसिद्ध मसाला है , जो सभी भारतीय रसोई में उपयोग किया जाता है। केसर फूलों से प्राप्त किया जाता है, और इसको खेती के जरिए उत्पादित किया जाता है। केसर की खेती (kesar ki kheti )की शुरुआत सिर्फ भारत में हुई थी लेकिन , अब इसकी खेती दुनिया भर में खेती की जा रही है।

केसर की खेती (Saffron Farming) के लिए उच्च धातुओं वाली मिट्टी की जरूरत होती है। इसके अलावा, शुष्क मौसम और खेती के लिए अधिक उपयुक्त जल व्यवस्था की आवश्यकता होती है। केसर की खेती के लिए बारिश या साइक्लोन जैसी भौगोलिक घटनाएं खतरनाक साबित हो सकती हैं।

एक अच्छी केसर की फसल के लिए समय पर बीज बोना जरूरी होता है। बीज बोने के लिए मई-जून महीने सबसे अच्छे होते हैं

KESAR KI KHETI

केसर की खेती (Kesar ki kheti ) कई तरह लाभ प्रदान करती है। कुछ मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:-

1. अधिक आय:– केसर एक मूल्यवान मसाला होता है ,और इसका उत्पादन अधिक आय प्रदान करता है।

2. रोग प्रतिरोधक क्षमता:- केसर में विटामिन सी और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं।

3. स्वास्थ्य में लाभ:- केसर एक प्राकृतिक रंग उत्पादक होता है, जो अगर व्यवस्थित रूप से खाया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है।

4. प्राकृतिक उर्वरक:- केसर की फसल से प्राकृतिक उर्वरक प्राप्त किए जा सकते हैं, जो अन्य फसलों के उत्पादन में सहयोगी हैं।

5. रोजगार :- केसर की खेती से (Kesar ki kheti ) कई (MANY) लोगों को रोजगार का CHANCE प्रदान किया जाता है।

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केसर किस -2 प्रकार USE होता है

केसर का उपयोग खाने के लिए अधिकतर मसाले के रूप में किया जाता है। यह खाने में स्वादिष्ट होता है, और भोजन में खुशबूदार महक और रंग उत्साह उत्पन्न करता है। केसर को भी चाय, कैंडी और मिठाई जैसी- वस्तुओं में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, केसर को धातु रंगों का उत्पादन करने में भी प्रयोग किया जाता है।

क्या केसर मेडिसिन में USE होता है ?

केसर के औषधीय गुणों के कारण, इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह त्वचा जैसी – समस्याओं, जैसे कि -एक्जीमा और डर्मैटाइटिस, में लाभकारी होता है। केसर खांसी, जुकाम और ठंड के लिए एक अच्छी घरेलू दवा मानी जाती है। इसके अलावा, केसर दर्द निवारक गुणों का धनी होता है , और पीरियड्स के दर्द को कम करने के लिए भी इस्तेमाल(USE) किया जाता है।

केसर कितने प्रकार का होता है

केसर दो प्रकार के होते हैं – लोहे के टगबंदी वाले केसर (Kesar ki kheti ) और बड़े साइज के टगबंदी वाले केसर। लोहे के टगबंदी वाले केसर मुख्य रूप से शामिल होते हैं , परंतु बड़े साइज के टगबंदी वाले केसर बाजार में अधिक मूल्य के होते हैं। यह केसर अधिक महंगे होते हैं, क्योंकि इनकी पैदावार कम होती है, और उत्पादन में ज्यादा समय लगता है।

केसर के प्रमुख्य उत्पादन राज्य भारत में

केसर की खेती के लिए बीज की खेती से अधिक उत्पादन देने वाले राज्यों में से कुछ निम्न हैं:

  1. जम्मू और कश्मीर

2. हिमाचल प्रदेश

3.उत्तराखंड

4.सिक्किम

5. अरुणाचल प्रदेश

6.मेघालय

7.उत्तर प्रदेश

8.पंजाब

9.हरियाणा

10.राजस्थान

11.गुजरात

इन राज्यों में केसर की खेती (Kesar ki kheti ) के लिए मुख्य रूप से सोना मिट्टी या लाल मिट्टी जैसी -उत्तम मिट्टी का उपयोग किया जाता है।

KESAR UGANE KA प्रमुख्य समय

केसर की खेती के लिए उपयुक्त समय फरवरी से नवंबर तक होता है। जबकि इसकी उन्नत विधि के लिए फरवरी में बीज बोए जाते हैं, और अगस्त-सितंबर महीने में मूल्यवान फूल उगते हैं। इसके पहले भी फूल उगते हैं, लेकिन वे मूल्यहीन होते हैं। इसलिए, केसर की उन्नत विधि के लिए अगस्त-सितंबर महीने में बीज बोना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

केसर की खेती के लिए मृदा एवं जलवायु 

कृषक भाइयों को केसर की खेती के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। केसर की खेती के लिए ठंडी एवं शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। भारत में केसर की खेती प्रमुख रूप से जम्मू और कश्मीर में की जाती है। केसर की खेती के लिए बेहतरीन जल निकासी वाली रेतीली दोमट मृदा शानदार होती है। केसर के बीज काफी ज्यादा छोटे होते हैं। इस वजह से इन्हें उगाने के लिए विशेष तकनीक का उपयोग करना होता है। साथ ही, इसके शानदार रखरखाव की भी जरूरत पड़ती है। इसकी खेती के लिए समय-समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण व कीट नियंत्रण की जरूरत होती है। केसर की फसल 7-8 महीने में पककर तैयार हो जाती है। फसल पकने के पश्चात केसर के फूलों को तोड़कर सुखाया जाता है। सूखे केसर को छीलकर बाजार में बेचा जाता है। 

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केसर की खेती से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

विशेषज्ञों के मुताबिक, केसर की खेती के लिए खेत की मृदा को बेहतर ढ़ंग से तैयार करें। मृदा की 2-3 बार जुताई करें फिर उसके बाद उसे एकसार कर दें। केसर के बीज की सितंबर-अक्टूबर माह के दौरान बिजाई की जाती है। बीज की 2-3 सेंटीमीटर गहराई में बिजाई करनी चाहिए। वहीं, इसकी फसल की नियमित तोर पर सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। विशेष तौर पर फूल आने के दौरान और फसल पकने के समय ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता होती है। फसल को वक्त-वक्त पर खाद और उर्वरक की जरूरत पड़ती है। केसर की फसल में खरपतवार का होना नुकसानदायक होता है। इस वजह से इन पर नियंत्रण भी आवश्यक है।