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सोयाबीन की बंपर पैदावार चाहिए तो बुवाई से पहले कर लें ये 8 तैयारी, वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी।

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खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत होने वाली है और मध्य भारत के सोयाबीन किसानों के लिए यह समय खेतों की सही तैयारी का है। राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र (NRCS) ने किसानों के लिए बुवाई से पहले अपनाई जाने वाली 8 महत्वपूर्ण सलाह जारी की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इन सुझावों को समय रहते अपनाते हैं, तो सोयाबीन की पैदावार बेहतर हो सकती है और फसल पर आने वाले जोखिम भी कम किए जा सकते हैं। खासकर मिट्टी की गुणवत्ता, बीज उपचार और खेत की तैयारी पर ध्यान देना इस बार बेहद जरूरी माना जा रहा है।

खेत की मिट्टी को मजबूत बनाना है सबसे जरूरी

गेहूं कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को जलाना कई किसान आसान तरीका मानते हैं, लेकिन इससे मिट्टी की उर्वरता तेजी से घटती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अवशेषों को रोटावेटर और वेस्ट डीकंपोजर की मदद से मिट्टी में मिलाएं। इससे मिट्टी में कार्बनिक कार्बन बढ़ता है और लाभकारी सूक्ष्मजीव सुरक्षित रहते हैं। वहीं गहरी गर्मी की जुताई हर साल करने के बजाय 3 साल में एक बार करना बेहतर माना गया है। इससे मिट्टी की संरचना संतुलित रहती है और अनावश्यक खर्च भी कम होता है।

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एक से ज्यादा किस्मों की बुवाई से घटेगा जोखिम

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सिर्फ एक ही किस्म की सोयाबीन बोना जोखिम भरा हो सकता है। यदि मौसम खराब हो जाए, रोग फैल जाए या अधिक बारिश हो जाए तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। इसलिए 2 से 3 अलग-अलग किस्मों की खेती करना अधिक सुरक्षित विकल्प माना गया है। इसके साथ खेत की तैयारी भी सही तरीके से करनी चाहिए। यदि इस साल गहरी जुताई की जा रही है तो पहले गहरी जुताई, फिर आड़ी-तिरछी जुताई और आखिर में पाटा लगाना चाहिए। वहीं जिन खेतों में पहले से गहरी जुताई हो चुकी है, वहां दो बार जुताई और पाटा पर्याप्त माना गया है।

गोबर खाद, हरी खाद और सब-सॉयलर से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत

विशेषज्ञों ने अंतिम जुताई से पहले अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद 5 से 10 टन प्रति हेक्टेयर या 2.5 टन पोल्ट्री खाद डालने की सलाह दी है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे ढैंचा की बुवाई करके उसे 45 से 50 दिन बाद मिट्टी में पलट सकते हैं। यह प्राकृतिक नाइट्रोजन का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसके अलावा हर 5 साल में एक बार सब-सॉयलर मशीन चलाने से मिट्टी की कठोर परत टूटती है और बारिश का पानी अंदर तक पहुंचता है, जिससे सूखे के समय भी खेत में नमी बनी रहती है।

बीज उपचार को न करें नजरअंदाज, यही है फसल का सुरक्षा कवच

सोयाबीन की सफल खेती के लिए बीज उपचार सबसे अहम कदम माना जाता है। वैज्ञानिकों ने बुवाई से पहले Azoxystrobin 2.5% + Thiophanate Methyl 11.25% + Thiamethoxam 25% FS का 10 मिली प्रति किलो बीज की दर से उपचार करने की सलाह दी है। इससे बीज जनित रोगों और शुरुआती कीट हमलों से सुरक्षा मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कम लागत वाला ऐसा उपाय है, जो किसानों को शुरुआती नुकसान से बचाकर बेहतर उत्पादन दिलाने में मदद कर सकता है।

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