मध्य प्रदेश के किसानों के लिए इस बार गेहूं उपार्जन व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए गए हैं। राज्य सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को आसान, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। सबसे खास बात यह है कि स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक समय मिल सके। सरकार का उद्देश्य साफ है कि किसानों को बिना किसी परेशानी के उचित मूल्य और बेहतर सुविधा मिले।
मुख्यमंत्री करेंगे औचक निरीक्षण, व्यवस्था पर सीधी नजर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ किया है कि वे खुद उपार्जन केंद्रों की निगरानी करेंगे और कभी भी अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। उनका हेलीकॉप्टर किसी भी केंद्र पर उतर सकता है, जहां वे सीधे किसानों से बातचीत करेंगे और मौके पर ही व्यवस्था का जायजा लेंगे। इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
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स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ी, अब ज्यादा समय मिलेगा
सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं उपार्जन और स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है। इससे उन किसानों को खास फायदा होगा जो अभी तक स्लॉट बुक नहीं कर पाए थे। अब वे आसानी से सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकेंगे। इसके साथ ही उपार्जन केंद्रों की क्षमता भी बढ़ाई गई है, जिससे भीड़ कम होगी और किसानों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। अब प्रति केंद्र खरीदी क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी गई है और अधिक तौल कांटे भी लगाए गए हैं।
₹2625 प्रति क्विंटल मिल रहा भाव, किसानों की आय बढ़ेगी
इस साल किसानों को गेहूं पर कुल ₹2625 प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। इसमें ₹2585 प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और ₹40 प्रति क्विंटल राज्य सरकार का बोनस शामिल है। अब तक प्रदेश में 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है और 5 लाख से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिला है। सरकार 3575 करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर कर चुकी है। इस साल 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया है, जिसे बेहतर प्रबंधन और नई तकनीक के जरिए पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
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