बिहार के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी मखाना खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। धान उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाले इस राज्य में अब किसान पारंपरिक खेती से हटकर नकदी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ‘सफेद सोना’ कहे जाने वाले मखाने की खेती को सरकार भी बढ़ावा दे रही है, जिससे किसानों को नई आय के अवसर मिल रहे हैं। खास बात यह है कि सरकार इस खेती के लिए अनुदान के साथ-साथ प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध करा रही है।
प्रोसेसिंग से बढ़ेगा मुनाफा
मखाना खेती की सबसे बड़ी खासियत इसकी वैल्यू एडिशन क्षमता है। किसान यदि केवल कच्चा बीज बेचने के बजाय उसे प्रोसेस करके तैयार मखाना बनाकर बाजार में बेचते हैं, तो उन्हें कई गुना ज्यादा कीमत मिलती है। बीज को सुखाकर, भूनकर और प्रोसेस करने के बाद तैयार मखाना बाजार में 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। यही वजह है कि यह खेती किसानों के लिए ज्यादा मुनाफेदार साबित हो रही है।
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सरकार की योजना और बढ़ता विस्तार
केंद्र सरकार की “सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना” के तहत छत्तीसगढ़ में इस फसल का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 से इस योजना का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है, जिसमें 178.11 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों में मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां तालाबों और खेतों दोनों में खेती शुरू हो चुकी है, जिससे किसानों की इस फसल के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।
2026-27 में बड़ा लक्ष्य और ट्रेनिंग पर जोर
राज्य सरकार ने 2026-27 के लिए 2 करोड़ रुपये की योजना बनाई है, जिसमें मखाना उत्पादन का दायरा और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि वे बेहतर उत्पादन कर सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, 1 किलो बीज से 200–250 ग्राम तैयार मखाना मिलता है, लेकिन सही प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से इससे अच्छी कमाई की जा सकती है। इस तरह मखाना खेती आने वाले समय में किसानों के लिए एक स्थायी और लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।
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