ब्रोकली एक विदेशी सब्जी है, जिसका उपयोग सलाद, सूप और हेल्दी डाइट में खूब किया जाता है। भारत में भी अब इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। बदलती खानपान आदतों और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण ब्रोकली की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। इसकी खेती करके किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
ब्रोकली की उन्नत किस्में और सही जलवायु
ब्रोकली मुख्य रूप से हरी, सफेद और बैंगनी रंग की होती है, जिनमें हरी ब्रोकली सबसे ज्यादा उगाई जाती है। इसकी प्रमुख किस्मों में डी निबको, ग्रीन बड, स्पार्टन अर्ली, ग्रीन स्प्राउटिंग और लेट स्प्राउटिंग शामिल हैं। इसकी खेती के लिए ठंडी जलवायु उपयुक्त होती है और अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है। रेतीली दोमट मिट्टी जिसमें अच्छी मात्रा में जैविक खाद हो, इसके लिए आदर्श रहती है।
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नर्सरी से रोपाई तक सही तरीका
ब्रोकली की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है। एक हेक्टेयर के लिए लगभग 400 से 500 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। अक्टूबर में नर्सरी लगाकर 25–30 दिन में पौधे तैयार हो जाते हैं। इसके बाद इन्हें खेत में 45 सेमी कतार दूरी और 30 सेमी पौधे की दूरी पर रोपाई करनी चाहिए, जिससे पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
खाद, सिंचाई और देखभाल के जरूरी टिप्स
अच्छी पैदावार के लिए संतुलित उर्वरक का उपयोग जरूरी है। प्रति हेक्टेयर खेत में लगभग 260 किलो यूरिया, 375 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट और 130 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश देना लाभकारी रहता है। इसके साथ ही खेत में नमी बनाए रखें, लेकिन पानी का जमाव न होने दें। समय-समय पर निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण करने से फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बेहतर होता है।
कटाई का सही समय और मुनाफा
रोपाई के लगभग 70 से 75 दिनों बाद ब्रोकली की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। ध्यान रखें कि कटाई सही समय पर करें, जब फूल पूरी तरह विकसित हो जाएं लेकिन खुलने न पाएं। सही समय पर कटाई करने से बाजार में बेहतर कीमत मिलती है। ब्रोकली की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल साबित हो सकती है, खासकर तब जब बाजार में इसकी मांग ज्यादा हो।
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