Kisan News: कम भूमि में अधिक फसल उत्पादन से होगा मुनाफा, अपनाएं यह तकनीक 

Kisan News: अगर आपके पास कंपू में है आप अधिक फसल उत्पादन कर अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको खेती का तरीका बदलना पड़ेगा। हसन की अच्छी पैदावार के लिए खेती करने का तरीका भी अच्छा होना चाहिए तभी आप मुनाफे की खेती कर सकते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही तकनीक की जानकारी देंगे जिसके माध्यम से आप कम भूमि पर फसल की बंपर पैदावार कर सकते हैं। इस तकनीक को सघन खेती या गहन खेती भी कहा जा सकता है। आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी प्रदान करेंगे।

Kisan News: सघन खेती करने की तकनीक आप एक ही समय में एक से अधिक फसल की खेती कर सकते हैं जिससे अगर आपको एक फसल में नुकसान होता है तो दूसरी फसल से आप उसकी भरपाई कर सकते हैं।सबसे बड़ी बात है कि खरपतवार का प्रकोप अन्य कृषि तकनीक की तुलना में न के बराबर होता है। सघन खेती की तकनीक से कम भूमि में अधिक मुनाफा और पैदावार होती है। इस तकनीक के तहत बहुउद्देशीय फसलें एक ही खेत में उगाई जाती है। इसमें आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग होता है। इसमें आप एक ही खेत में आम, अमरूद,केला, पपीता और बीच में सब्जियां उगा सकते हैं। 

Kisan News: सीधी धूप में मौसमी सब्जियां और कम धूप में बेमौसमी सब्जियां जो सर्दियों में उगाई जाती है, उनकी फसल उगा सकते हैं जैसे- पालक, धनिया, गाजर, चना साग आदि. साथ ही अदरक हल्दी जो की छांव में होती हैं वो भी उगा सकते हैं।सघन खेती विधि अपनाने से किसानों को अधिक लाभ होता है। सबसे बड़ा लाभ है कि सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत होती है।कुछ फसलें आपस में एक-दूसरे को लाभ भी देती हैं जैसे- दलहन नोइट्रोजन उत्पन्न करती है जो दूसरी फसलों के लिए लाभकारी है।सघन खेती विधि में पौधे का आकार छोटा होता है जिससे प्राकृतिक संसाधनों जैसे- धूप, जमीन और पानी आदि का अधिकतम इस्तेमाल होता है। 

सघन खेती की तकनीक: उत्पादित समय घटता है, जल्दी फल मिलना शुरू हो जाता है। कटाई, छंटाई और स्प्रे करना भी आसान होता है।जड़ें अधिक गहराई तक जाती हैं जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया अधिक होती है। इससे फलों की गुणवत्ता बढ़ती है।भारत में बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्यान्न की समस्या हल करना एक बड़ी चुनौती है।खेती योग्य भूमि कम होती है और खाद्यान्न की मांग ज्यादा है ऐसे में भारत जैसे देश में सघन खेती को अपनाकर बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाकर पूर्ति की जा सकती है।पूंजी की समस्या- सबसे बड़ी बाधा पूंजी की है. अधिकांश किसान लघु और सीमांत किसान हैं। जिनके पास फसल उत्पादन लागत लगाने के लिए पूंजी की समस्या रहती है।

सघन खेती: सघन खेती में अधिक पूंजी की जरुरत होती है। सिंचाई के साधनों का अभाव- भारतीय कृषि वर्षा पर निर्भर है। सिंचाई के साधनों के अभाव में  सघन खेती को अपनाना संभव नहीं है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारें सिंचाई के साधन विकसित करने की कोशिश कर रही हैं। देश की नदियों को जोड़ने का काम जारी है जो एक लंबा कार्यक्रम है। नई तकनीक की जानकारी न होना, गांव के कई किसान अशिक्षित हैं।उन्हें खेती की उन्नत तकनीक और विधियों का ज्ञान नहीं है। ऐसे में सघन खेती को अपनाना चुनौतीपूर्ण काम है। खेतों का दूर-दूर फैले होना- भारत के ग्रामीण इलाकों में खेत दूर-दूर फैले हुए हैं और आकार में भी छोटे हैं। इसलिए भारतीय कृषि का यंत्रीकरण करना आसान नहीं है।