मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे भारत के कृषि बाजारों पर दिखाई देने लगा है। खासकर बासमती चावल, मूंगफली और खाद्य तेल जैसी प्रमुख फसलों में दबाव बढ़ गया है। समुद्री मार्गों में रुकावट और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण निर्यात प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर देश की मंडियों में कीमतों पर पड़ रहा है। इससे किसान और व्यापारी दोनों चिंता में हैं, क्योंकि बाजार में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।
बासमती चावल के बाजार में गिरावट का दबाव
भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती चावल निर्यातक है, और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट देशों में जाता है। लेकिन मौजूदा संकट के चलते कई शिपमेंट बंदरगाहों पर अटक गए हैं और नए ऑर्डर भी धीमे पड़ गए हैं। बढ़ते फ्रेट चार्ज और बीमा लागत ने निर्यात को महंगा बना दिया है। इसके कारण विदेशी खरीदार फिलहाल नए सौदे करने से बच रहे हैं। घरेलू बाजार में मांग कमजोर पड़ने से बासमती के भाव में 400–500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरावट का दबाव देखा जा रहा है।
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मूंगफली और खाद्य तेल बाजार में सुस्ती
मूंगफली और खाद्य तेल का बाजार भी इस समय कमजोर स्थिति में है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की बाधाओं का असर खाद्य तेलों पर पड़ रहा है। हालांकि आमतौर पर क्रूड ऑयल महंगा होने पर खाद्य तेल भी महंगे होते हैं, लेकिन इस समय घरेलू मांग कमजोर होने और पर्याप्त स्टॉक होने के कारण कीमतों में तेजी नहीं आ रही। मूंगफली की खरीद भी धीमी है, जिससे किसानों को उचित भाव नहीं मिल पा रहा है।
दिल्ली मंडी समेत प्रमुख बाजारों का रुख
दिल्ली की लॉरेंस रोड मंडी सहित कई प्रमुख बाजारों में इस समय मांग सीमित बनी हुई है। गेहूं, चावल और अन्य जिंसों के भाव स्थिर से नरम बने हुए हैं। मंडियों में आवक सामान्य है, लेकिन खरीदारों की सक्रियता कम होने के कारण कीमतों में मजबूती नहीं आ रही। व्यापारियों के अनुसार निर्यात में कमी और घरेलू खरीदारी में सुस्ती इसकी मुख्य वजह है।
ग्लोबल कारण: क्यों बढ़ रहा है दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ी है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अहम समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे सप्लाई चेन बाधित हो गई है। इसके अलावा परिवहन लागत और बीमा शुल्क में बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार महंगा हो गया है। ऐसे में कई आयातक देश फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं, जिससे निर्यात आधारित कृषि जिंसों पर दबाव बढ़ गया है।
प्रमुख मंडियों में आज के भाव (₹/क्विंटल)
- बासमती 1121 (हरियाणा/पंजाब): 4,800 – 5,300 (हल्की गिरावट)
- बासमती 1509 (उत्तर भारत): 3,800 – 4,200 (दबाव)
- सेला राइस (निर्यात बाजार): 6,500 – 7,200 (सुस्त)
- मूंगफली (गुजरात/राजस्थान): 5,200 – 6,000 (कमजोर)
- सरसों (राजस्थान): 5,400 – 5,900 (स्थिर से नरम)
- सरसों तेल (दिल्ली, ₹/10 किलो): 1,150 – 1,250 (दबाव)
- सोया तेल (इंदौर/मुंबई, ₹/10 किलो): 950 – 1,050 (सुस्त)
- गेहूं (दिल्ली लॉरेंस रोड): 2,450 – 2,650 (स्थिर)
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख
आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगी। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है और समुद्री मार्ग सामान्य होते हैं, तो बासमती समेत अन्य जिंसों में तेजी लौट सकती है। लेकिन अगर संकट लंबा खिंचता है, तो निर्यात और कमजोर हो सकता है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बना रहेगा। फिलहाल बाजार “वेट एंड वॉच” की स्थिति में है, जहां किसान और व्यापारी दोनों वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।





