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Tinda Crop Leaves Yellowing Fast? Here’s What Experts Say About the Cause and Best Spray Solution.

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टिंडा (राउंड गार्ड) की फसल में इन दिनों पत्तियों के पीले पड़ने की समस्या कई किसानों के सामने आ रही है। अक्सर इसे पोषक तत्वों की कमी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यह सोच नुकसानदायक साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या ज्यादातर डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew) नामक फफूंद जनित रोग के कारण होती है, जो नमी और ठंडे मौसम में तेजी से फैलता है और फसल की पैदावार पर सीधा असर डालता है।

डाउनी मिल्ड्यू रोग के लक्षण पहचानें

इस रोग की शुरुआत पत्तियों की ऊपरी सतह पर हल्के पीले धब्बों से होती है। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, पत्तियों की निचली सतह पर भूरे या बैंगनी रंग की फफूंद जैसी परत दिखाई देने लगती है। धीरे-धीरे पौधे कमजोर होने लगते हैं, उनकी बढ़वार रुक जाती है और फलन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। समय पर पहचान न होने पर यह रोग पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है।

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समय पर नियंत्रण ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों के अनुसार, इस रोग को नियंत्रित करने के लिए रिडोमिल (Ridomil) का छिड़काव काफी प्रभावी माना जाता है। इसके लिए 300 ग्राम दवा को 200 लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार करें, जो लगभग 1 एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होता है। छिड़काव करते समय इस बात का ध्यान रखें कि दवा पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों हिस्सों तक अच्छी तरह पहुंचे, तभी इसका पूरा फायदा मिलेगा।

किसानों के लिए जरूरी सावधानियां और सुझाव

किसानों को चाहिए कि वे बारिश या सिंचाई के बाद फसल की नियमित जांच करें, खासकर पत्तियों की निचली सतह पर ध्यान दें। यदि रोग के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उपचार शुरू करें और जरूरत पड़ने पर 7–10 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें। शुरुआती चरण में ही सही कदम उठाने से न केवल फसल को बचाया जा सकता है, बल्कि उत्पादन में होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।

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