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130 दिन में शानदार पैदावार देने वाली पूसा बासमती 1637, जानिए क्यों बढ़ रही है किसानों में इसकी मांग।

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देश के बासमती धान उत्पादक किसानों के लिए पूसा बासमती 1637 एक उन्नत और अधिक उपज देने वाली धान की किस्म है। इस किस्म को ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा मार्कर असिस्टेड सिलेक्शन (MAS) तकनीक से विकसित किया गया है। यह लोकप्रिय पूसा बासमती 1 का उन्नत संस्करण है, जिसे विशेष रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर उत्पादन के लिए तैयार किया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली एनसीआर, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब के किसानों के लिए यह किस्म अनुशंसित की गई है।

ब्लास्ट रोग के खिलाफ मजबूत सुरक्षा

पूसा बासमती 1637 की सबसे बड़ी खासियत इसका ब्लास्ट रोग के प्रति प्रतिरोध है। इसमें Pi9 जीन शामिल किया गया है, जो लीफ ब्लास्ट रोग के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करता है। परीक्षणों के दौरान इस किस्म ने बहुत कम रोग प्रभाव दिखाया, जबकि पारंपरिक पूसा बासमती 1 में रोग की गंभीरता अधिक पाई गई। यही कारण है कि ब्लास्ट प्रभावित क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए यह किस्म अधिक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी है।

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बेहतर उत्पादन के साथ प्रीमियम गुणवत्ता

यह धान की किस्म लगभग 130 दिनों में तैयार हो जाती है और औसतन 4.2 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है। इसके दाने लंबे, पतले और आकर्षक होते हैं, जिनकी लंबाई लगभग 7.3 मिमी होती है। पकने के बाद दाने लगभग 13.8 मिमी तक लंबे हो जाते हैं। इसके अलावा इसमें बासमती की तेज और प्राकृतिक सुगंध मौजूद रहती है, जिससे बाजार और निर्यात दोनों में इसकी मांग बनी रहती है।

निर्यात के लिए भी उपयुक्त किस्म

पूसा बासमती 1637 में दानों का चाकपन बहुत कम होता है, जो उच्च गुणवत्ता वाली बासमती किस्मों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। इसके उत्कृष्ट दाना गुण, लंबाई और सुगंध इसे प्रीमियम बासमती श्रेणी में शामिल करते हैं। यही वजह है कि यह किस्म घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है और किसानों को बेहतर कीमत दिलाने में मदद करती है।

किसानों के लिए लाभदायक विकल्प

यदि किसान ऐसी बासमती धान की किस्म की तलाश में हैं जो अधिक उपज दे, रोगों से सुरक्षित हो और बाजार में अच्छी कीमत दिलाए, तो पूसा बासमती 1637 एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। इसकी 130 दिन की अवधि, 4.2 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन क्षमता और ब्लास्ट रोग के प्रति मजबूत प्रतिरोध इसे उत्तर भारत के बासमती उत्पादक क्षेत्रों के किसानों के लिए एक लाभदायक और भरोसेमंद किस्म बनाते हैं।

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