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कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाना है तो अपनाएं पूसा बासमती 1847, जानिए इसकी खासियत।

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धान किसानों के लिए पूसा बासमती 1847 एक बेहतरीन और अधिक उत्पादन देने वाली बासमती किस्म बनकर सामने आई है। इसे ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा आधुनिक मार्कर असिस्टेड सिलेक्शन (MAS) तकनीक की मदद से विकसित किया गया है। यह किस्म लोकप्रिय पूसा बासमती 1509 से विकसित की गई है और कम समय में तैयार होने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले लंबे दाने देने के लिए जानी जाती है। दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बासमती उत्पादक क्षेत्रों के लिए यह किस्म विशेष रूप से अनुशंसित है।

बैक्टीरियल ब्लाइट और ब्लास्ट रोगों से मिलती है सुरक्षा

पूसा बासमती 1847 की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता है। वैज्ञानिकों ने इसमें बैक्टीरियल ब्लाइट से सुरक्षा देने वाले xa13 और Xa21 तथा ब्लास्ट रोग से बचाव करने वाले Pi54 और Pi2 जीन शामिल किए हैं। इन रोग प्रतिरोधी गुणों की वजह से फसल पर रोगों का असर कम होता है और किसानों को बार-बार महंगे कीटनाशक या रासायनिक स्प्रे का उपयोग नहीं करना पड़ता। इससे खेती की लागत कम होती है और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचता है।

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120 दिन में तैयार होकर देती है शानदार उत्पादन

यह उन्नत बासमती किस्म केवल 120 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को अगली फसल की बुवाई के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इसकी नर्सरी बुवाई 15 जून से 30 जून के बीच करने की सलाह दी जाती है। लगभग 110 सेंटीमीटर ऊंचे पौधे वाली यह किस्म गिरने की समस्या से काफी हद तक मुक्त रहती है। इसकी औसत उपज करीब 5.7 टन प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई है, जो इसे अधिक उत्पादन देने वाली बासमती किस्मों में शामिल करती है।

लंबे दाने और शानदार सुगंध इसकी पहचान

पूसा बासमती 1847 अपने अतिरिक्त लंबे और आकर्षक दानों के लिए भी प्रसिद्ध है। पकाने से पहले इसके दानों की लंबाई लगभग 8.51 मिमी होती है, जो पकने के बाद बढ़कर 16.69 मिमी तक पहुंच जाती है। चावल में बहुत कम चाकपन होता है और इसकी तेज बासमती सुगंध उपभोक्ताओं को आकर्षित करती है। पकने के बाद चावल फूला हुआ, मुलायम और स्वादिष्ट बनता है, जिससे इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।

किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है यह किस्म

अधिक उपज, कम अवधि में परिपक्वता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और प्रीमियम गुणवत्ता वाले दानों के कारण पूसा बासमती 1847 किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन सकती है। यह किस्म धान-गेहूं फसल चक्र में भी अच्छी तरह फिट बैठती है और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक मुनाफा कमाने का अवसर देती है। यदि किसान कम समय में तैयार होने वाली और उच्च गुणवत्ता वाली बासमती धान की खेती करना चाहते हैं, तो पूसा बासमती 1847 एक उत्कृष्ट विकल्प साबित हो सकती है।

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