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कम समय में ज्यादा उत्पादन और प्रीमियम क्वालिटी, किसानों की पहली पसंद बनी पूसा बासमती HD-1692

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित पूसा बासमती HD-1692 धान की एक उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली बासमती किस्म है। यह किस्म अपने लंबे पतले दानों, शानदार खुशबू और बेहतर गुणवत्ता के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। जो किसान अधिक उपज के साथ प्रीमियम क्वालिटी का बासमती चावल उत्पादन करना चाहते हैं, उनके लिए यह किस्म काफी लाभदायक मानी जा रही है।

लंबे दाने और बेहतरीन गुणवत्ता इसकी खास पहचान

पूसा बासमती HD-1692 के दाने अंतरराष्ट्रीय बासमती मानकों के अनुसार अतिरिक्त लंबे और पतले होते हैं। पकाने से पहले इसकी दाने की लंबाई लगभग 8.44 मिमी रहती है, जबकि पकने के बाद यह करीब 17 मिमी तक लंबा हो जाता है। इसकी खुशबू काफी तेज होती है और पकने के बाद चावल फूला हुआ तथा नॉन-स्टिकी रहता है। यही वजह है कि घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

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मिलिंग में ज्यादा साबुत चावल मिलने से बढ़ता है फायदा

इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बेहतर हेड राइस रिकवरी (HRR) है, जो लगभग 54.35 प्रतिशत तक होती है। इसका मतलब यह है कि मिलिंग के दौरान ज्यादा मात्रा में साबुत चावल प्राप्त होते हैं, जिससे राइस मिल मालिकों और व्यापारियों को अच्छा लाभ मिलता है। इसके अलावा इसकी मध्यवर्ती एमाइलोज मात्रा और शानदार विस्तार अनुपात इसे प्रीमियम क्वालिटी बासमती चावल की श्रेणी में शामिल करते हैं।

इन राज्यों में खेती के लिए सबसे उपयुक्त

पूसा बासमती HD-1692 की खेती मुख्य रूप से बासमती GI क्षेत्र वाले राज्यों में करने की सलाह दी जाती है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों की जलवायु इस किस्म के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है। सही समय पर बुवाई और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान इस किस्म से बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही यह किस्म

अगर किसान ऐसी धान की किस्म की तलाश में हैं जो अधिक उपज देने के साथ-साथ बाजार में बेहतर कीमत भी दिलाए, तो पूसा बासमती HD-1692 एक शानदार विकल्प बन सकती है। इसकी तेज खुशबू, लंबे दाने, बेहतर गुणवत्ता और अच्छी मिलिंग रिकवरी इसे दूसरी बासमती किस्मों से अलग बनाती है। यही कारण है कि आज कई किसान पारंपरिक किस्मों की जगह इस आधुनिक बासमती किस्म को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।

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