केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और सिंचाई व्यवस्था को सस्ती व आधुनिक बनाने के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना का नया संस्करण “पीएम-कुसुम 2.0” जल्द लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य खेती में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और किसानों को अतिरिक्त कमाई का नया स्रोत उपलब्ध कराना है। खासतौर पर फल, सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
खेतों में लगेंगे ऊंचे सोलर पैनल, खेती भी होगी जारी
सरकार की योजना के तहत किसानों के खेतों में ऊंचे ढांचे पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन पैनलों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि नीचे खेती का काम प्रभावित न हो। जानकारी के अनुसार, एग्री-पीवी मॉडल के तहत सोलर पैनल कम से कम 2.1 मीटर की ऊंचाई पर लगाए जाएंगे, जिससे फसलों को पर्याप्त धूप और आंशिक छाया दोनों मिल सके। टमाटर, बैंगन, पपीता, आम जैसी कई फसलें हल्की छाया में बेहतर उत्पादन देती हैं, इसलिए फल और सब्जी उत्पादकों को इसका अधिक लाभ मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य इस मॉडल के जरिए करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ाना है।
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किसानों को मिलेगी दोहरी आय की सुविधा
पीएम-कुसुम 2.0 योजना किसानों को खेती और बिजली उत्पादन दोनों से कमाई का अवसर दे सकती है। किसान अपनी फसल बेचने के साथ-साथ सोलर पैनलों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर हर महीने अतिरिक्त आय कमा सकेंगे। बड़ी जोत वाले किसानों के लिए यह योजना लाखों रुपये तक की अतिरिक्त कमाई का माध्यम बन सकती है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।
डीजल पंपों से राहत और सिंचाई होगी सस्ती
नई योजना का एक बड़ा उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल पंपों की निर्भरता कम करना भी है। सरकार चाहती है कि सिंचाई व्यवस्था को पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित बनाया जाए, ताकि किसानों को सस्ती या मुफ्त बिजली मिल सके। इससे किसानों की सिंचाई लागत घटेगी, प्रदूषण कम होगा और समय पर सिंचाई की सुविधा मिलेगी। साथ ही राज्य सरकारों पर बिजली सब्सिडी का बोझ भी कम हो सकता है।
50 हजार करोड़ रुपये के बजट पर काम
सूत्रों के मुताबिक, पीएम-कुसुम 2.0 योजना के लिए करीब 50 हजार करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट तैयार किया जा रहा है। यह मौजूदा योजना की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत अधिक बताया जा रहा है। योजना में विकेंद्रीकृत सोलर प्लांट, फीडर लेवल सोलराइजेशन और बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि रात के समय भी बिजली उपलब्ध कराई जा सके। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इस योजना का कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है और मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
पिछली योजना से मिले अनुभव के बाद होगा सुधार
वर्ष 2019 में शुरू हुई मौजूदा पीएम-कुसुम योजना अपने तय लक्ष्यों तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 10 हजार मेगावाट के लक्ष्य के मुकाबले सीमित क्षमता ही स्थापित हो पाई। वहीं लाखों सोलर पंपों के लक्ष्य की तुलना में कम पंप ही सोलराइज्ड हो सके। हालांकि अब तक 21 लाख से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल चुका है। वित्तीय चुनौतियां, ग्रिड कनेक्टिविटी और जागरूकता की कमी जैसी समस्याओं को देखते हुए सरकार अब पीएम-कुसुम 2.0 को ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रही है।
किसानों के लिए बन सकती है गेम चेंजर योजना
यदि पीएम-कुसुम 2.0 योजना तय समय पर लागू होती है, तो यह किसानों के लिए खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का बड़ा अवसर साबित हो सकती है। खासतौर पर फल, सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों को इससे सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है। सौर ऊर्जा आधारित खेती भविष्य में किसानों की लागत कम करने और आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
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