केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के चना किसानों को बड़ी राहत देते हुए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत चना खरीद की सीमा बढ़ाने का फैसला लिया है। अब सरकार राज्य के किसानों से 8.19 लाख मीट्रिक टन चना खरीदेगी। इस खरीद पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत करीब 4,816.80 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बाजार में दामों में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा था। माना जा रहा है कि इस कदम से लाखों चना उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी और उनकी आय को मजबूती मिलेगी।
किसानों को सीधे MSP पर मिलेगा भुगतान
मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत सरकारी एजेंसियां किसानों से सीधे चना खरीदेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार में होने वाली कीमत गिरावट से बचाना और उनकी फसल का तय न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाना है। आमतौर पर फसल कटाई के समय बाजार में ज्यादा आवक होने से कीमतें कम हो जाती हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन MSP पर सरकारी खरीद होने से किसानों को अपनी फसल का बेहतर और सुरक्षित दाम मिल सकेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और किसानों का भरोसा बढ़ेगा।
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दलहन उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार लगातार दलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि MSP पर ज्यादा खरीद होने से किसान चना जैसी दलहन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे देश में दालों का उत्पादन बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। सरकार का मानना है कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाने के लिए MSP आधारित खरीद प्रणाली काफी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यही वजह है कि अलग-अलग फसलों की सरकारी खरीद का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
कर्नाटक के सूरजमुखी किसानों को भी मिला लाभ
महाराष्ट्र के साथ-साथ केंद्र सरकार ने कर्नाटक के सूरजमुखी किसानों को भी बड़ी राहत दी है। सरकार ने रबी सीजन 2025-26 के तहत 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी खरीद को मंजूरी दी है। इस खरीद पर किसानों को करीब 69.66 करोड़ रुपये का MSP भुगतान किया जाएगा। दोनों राज्यों को मिलाकर किसानों को कुल 4,886 करोड़ रुपये से ज्यादा की MSP सुरक्षा मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी खरीद बढ़ने से किसानों को निजी व्यापारियों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और उन्हें समय पर सही भुगतान मिलने में भी मदद मिलेगी।
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