कर्नाटक में दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय मजबूत करने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की गई है। भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान बेंगलुरु और कर्नाटक कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्री-खरीफ ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दलहनी फसलों की उन्नत खेती, नई तकनीकों के प्रसार और उत्पादन बढ़ाने को लेकर विस्तृत तकनीकी रोडमैप तैयार किया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि आने वाले समय में आधुनिक तकनीकों के जरिए किसानों को अधिक लाभ दिलाने पर फोकस रहेगा।
अरहर उत्पादन बढ़ाने और रोग प्रबंधन पर खास जोर
बैठक में अरहर को कर्नाटक की प्रमुख दलहनी फसल बताते हुए इसके उत्पादन विस्तार पर विशेष चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को नई और उच्च उत्पादक किस्में अपनाने की सलाह दी। साथ ही विल्ट रोग जैसी समस्याओं से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर रोग प्रबंधन और तकनीकी सलाह मिलने से किसानों की फसल हानि कम होगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
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जलवायु अनुकूल खेती और गुणवत्तापूर्ण बीजों पर फोकस
बैठक में वैज्ञानिकों ने संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और जलवायु अनुकूल खेती को बेहद जरूरी बताया। सूखा और बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को नई रणनीतियों के साथ खेती करने की सलाह दी गई। जानकारी के अनुसार कर्नाटक में करीब 34.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी फसलें उगाई जाती हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत मिनी किट वितरण और बीज हब को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।
तकनीकी हस्तांतरण से किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
बैठक में प्रदर्शन आधारित तकनीकी हस्तांतरण, नियमित प्री-सीजन बैठकें और स्पष्ट तकनीकी दिशा-निर्देश जारी करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा पौध संरक्षण, जैव-कीटनाशक उपयोग, खरपतवार नियंत्रण और नई मूंग किस्मों के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में करीब 100 वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर कर्नाटक में दलहन उत्पादन को आत्मनिर्भर, टिकाऊ और किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने पर सहमति जताई।
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