हैदराबाद के पास पेड्डा गोलकोंडा के मंकाला क्षेत्र में स्थित एक आम का बाग आज रसायन-मुक्त आम उत्पादन का सफल मॉडल बन चुका है। करीब 550 आम के पेड़ों वाले इस बाग में इमाम पसंद, केसरी, दशहरी, बेनिशान और अन्य लोकप्रिय किस्मों की खेती की जा रही है। लगभग 10 वर्ष पुराने इन पेड़ों को 7 मीटर की दूरी पर लगाया गया है, जिससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके। इस बाग के किसान श्री कौशिक का उद्देश्य बाजार में केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वादिष्ट, उच्च गुणवत्ता वाले और रसायन अवशेष-मुक्त आम तैयार करना है। यही वजह है कि वे अपने बाग के आम रिश्तेदारों और मित्रों को निःशुल्क वितरित करते हैं।
फसल नुकसान के बाद अपनाई संशोधित जैविक खेती
वर्ष 2024-25 में बाग में भरपूर फूल आने के बावजूद अत्यधिक रासायनिक स्प्रे और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से फल टिकाव प्रभावित हुआ। फल कम बने और उनकी गुणवत्ता भी अपेक्षा के अनुसार नहीं रही। इसके बाद किसान को संशोधित जैविक खेती अपनाने की सलाह दी गई। इस नई रणनीति में कृषि अपशिष्ट और गिरी हुई पत्तियों का पुनर्चक्रण, जैव उर्वरकों का उपयोग, समय पर छंटाई और गोशाला धुलाई जल का किण्वित रूप में प्रयोग शामिल था। रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का उपयोग लगभग बंद कर दिया गया। इसके साथ ही कंटूर बंडिंग, मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की नमी और उर्वरता को बेहतर बनाया गया।
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जैव नियंत्रण एजेंट और पोषक तत्व प्रबंधन से मिला फायदा
बाग में हॉपर, थ्रिप्स, एफिड्स, पाउडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेक्नोज जैसे रोगों और कीटों के नियंत्रण के लिए रासायनिक दवाओं की जगह जैव नियंत्रण एजेंटों का उपयोग किया गया। इसके तहत Bacillus thuringiensis, Beauveria, Metarhizium और Ampelomyces quisqualis जैसे जैविक एजेंटों का प्रयोग किया गया। वहीं फूल आने और फल विकास के दौरान मोनो अमोनियम फॉस्फेट, पोटेशियम नाइट्रेट, कैल्शियम नाइट्रेट और सल्फेट ऑफ पोटाश जैसे जल में घुलनशील उर्वरकों का सीमित पर्णीय छिड़काव किया गया। सूक्ष्म पोषक तत्वों में मैग्नीशियम, मैंगनीज और बोरॉन के उपयोग से पुष्पन और फल सेटिंग में अच्छा सुधार देखा गया। इससे पेड़ों की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत हुई और फलों की गुणवत्ता बेहतर बनी रही।
मौसम की चुनौतियों के बावजूद सफल रहा मॉडल
दिसंबर 2025 में बाग में फूल आना शुरू हुआ और मई 2026 तक फलों का विकास संतोषजनक रहा। हालांकि आंधी-तूफान और कम तापमान जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण कुछ हिस्सों में नुकसान हुआ और फलों की पकने की प्रक्रिया में 10 से 20 दिन की देरी भी देखी गई। इसके बावजूद बाग में अच्छे आकार, बेहतर स्वाद और रसायन अवशेष-मुक्त आमों का उत्पादन संभव हुआ। यह मॉडल दिखाता है कि वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, जैव नियंत्रण उपायों और समृद्ध जैविक खाद के संतुलित उपयोग से किसान कम लागत में टिकाऊ और लाभकारी आम की खेती कर सकते हैं। आने वाले समय में रसायन-मुक्त आम उत्पादन किसानों के लिए बेहतर मिट्टी स्वास्थ्य और उच्च गुणवत्ता वाले फलों का मजबूत विकल्प बन सकता है।
हैदराबाद के इस आम बाग की देशभर में चर्चा, जैविक तरीके से तैयार हो रहे प्रीमियम क्वालिटी आम।





