आम की फसल में फूल आने से लेकर फल बनने तक का समय बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान कई खतरनाक कीट तेजी से फैलते हैं और फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। अगर समय पर इनकी पहचान और नियंत्रण नहीं किया जाए, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। इसलिए किसानों के लिए जरूरी है कि वे प्रमुख कीटों और उनके वैज्ञानिक नियंत्रण के तरीकों को अच्छी तरह समझें।
उन्नत किस्मों के साथ सही कीट प्रबंधन भी है जरूरी
देश के कई राज्यों में आम की उन्नत किस्में जैसे दशहरी, लंगड़ा, आम्रपाली, बाम्बे ग्रीन, मल्लिका, तोतापरी और नीलम की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। बेहतर उत्पादन पाने के लिए सिर्फ अच्छी किस्म का चयन ही नहीं, बल्कि सही समय पर कीट नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। सही प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
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आम की फसल के प्रमुख कीट और उनके नुकसान
आम का फुदका (भुनगा) सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कीट है, जो पत्तियों और फूलों का रस चूसकर उन्हें गिरा देता है। गुजिया (मिली बग) भी फूलों और कोमल भागों को नुकसान पहुंचाकर फल बनने से रोकती है। शाखा बेधक कीट पेड़ के तने में सुरंग बनाकर उसे कमजोर कर देता है, जबकि गुठली का घुन फल के अंदर रहकर उसे खराब करता है। इसके अलावा फल भेदक और पुष्प गुच्छ मिज भी बौर और छोटे फलों को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन को प्रभावित करते हैं।
इन कीटों से बचाव के असरदार उपाय
इन सभी कीटों से बचाव के लिए समय पर निगरानी और सही दवाओं का उपयोग बेहद जरूरी है। फुदका के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्साम का छिड़काव करें। मिली बग से बचाव के लिए पेड़ों पर चिपचिपा बैंड लगाएं और क्लोरोपाइरीफॉस का उपयोग करें। शाखा बेधक के लिए छेद को साफ कर उसमें दवा डालकर बंद करें। गुठली के घुन और फल भेदक के लिए उचित कीटनाशकों का छिड़काव करें और संक्रमित फलों को नष्ट करें। साथ ही, बाग की नियमित सफाई और गहरी जुताई से भी कीटों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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