मध्यप्रदेश में इस समय मूंग की फसल पर रस चूसक कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जो किसानों के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेतों में माहू, जैसिड, थ्रिप्स और सफेद मक्खी जैसे कीट सक्रिय हो गए हैं। ये कीट फसल की बढ़वार को रोकते हैं और उत्पादन पर सीधा असर डालते हैं। समय रहते इन पर नियंत्रण न किया जाए तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कैसे नुकसान पहुंचाते हैं ये कीट
माहू कीट पौधों की कोमल पत्तियों, फूलों और फलियों से रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है, जिससे पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। इसके अलावा यह मधु स्राव छोड़ता है, जिससे पत्तियों पर काली फफूंद विकसित हो जाती है। जैसिड पत्तियों के नीचे से रस चूसता है, जिससे पत्तियों के किनारे पीले पड़ जाते हैं। वहीं थ्रिप्स पत्तियों और फूलों को नुकसान पहुंचाकर फसल की गुणवत्ता खराब कर देती है। सफेद मक्खी पीला मोजेक वायरस फैलाकर पूरी फसल को बर्बाद करने की क्षमता रखती है।
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कीट नियंत्रण के लिए सही उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को कीट नियंत्रण के लिए समय पर सही दवा का उपयोग करना चाहिए। इसके लिए थायोमिथाक्साम 25 WG, एसिटामिप्रिड 20 SP, थायोमिथाक्साम + लेम्डासायलोथ्रिन (125 ग्राम/हेक्टेयर) या फिप्रोनिल + इमिडाक्लोप्रिड (150 ग्राम/हेक्टेयर) में से किसी एक का छिड़काव किया जा सकता है। ध्यान रखें कि हर बार एक ही दवा का उपयोग न करें, बल्कि दवा बदल-बदलकर छिड़काव करें, ताकि कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित न हो। साथ ही चने की इल्ली और मारूका इल्ली से बचाव के लिए शुरुआती अवस्था में इंडोक्साकार्ब या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल का उपयोग प्रभावी माना गया है।
खरपतवार नियंत्रण और सावधानियां
मूंग की अच्छी पैदावार के लिए खरपतवार नियंत्रण भी बेहद जरूरी है। बुवाई के 15–20 दिन बाद इमेजेथापायर, प्रोपाक्विजाफॉप + इमेजेथापायर या अन्य अनुशंसित दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। छिड़काव हमेशा सुबह 10 बजे से पहले या शाम 4 बजे के बाद ही करें, ताकि दवा का असर बेहतर हो और फसल सुरक्षित रहे। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे दवाओं का उपयोग निर्धारित मात्रा में और विशेषज्ञों की सलाह से ही करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और उत्पादन बेहतर मिल सके।





