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गर्मी आते ही लीची पर मंडराया कीटों का खतरा, फसल बचाने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स।

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गर्मी का मौसम शुरू होते ही लीची के बागानों में फलों का तेजी से विकास होता है, लेकिन इसी समय कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित नेशनल लीची रिसर्च सेंटर ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए बताया है कि इस समय फल बेधक कीट (Fruit Borer) सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

फल बेधक कीट कैसे पहुंचाता है नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार यह कीट लीची के फल में छोटा छेद करके अंदर प्रवेश करता है और गूदे को नुकसान पहुंचाता है। बाहर से फल सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर से वह खराब हो चुका होता है। इसके कारण फल समय से पहले गिरने लगते हैं और सड़न की समस्या बढ़ जाती है। कई मामलों में यह कीट 60 से 80 प्रतिशत तक फसल को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक हानि होती है।

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बचाव के आसान और असरदार उपाय

इस कीट से बचाव के लिए सबसे जरूरी है बाग की साफ-सफाई। गिरे हुए और सड़े-गले फलों को तुरंत हटाकर नष्ट करें, ताकि कीट का प्रसार रुक सके। इसके अलावा फल लगने के बाद उन्हें कागज या कपड़े की थैली से ढकना (बैगिंग) एक बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है। कीटों की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करें, जिससे समय रहते कीट की पहचान और नियंत्रण आसान हो जाता है।

कीटनाशक और पोषण प्रबंधन से बढ़ेगी सुरक्षा

जरूरत पड़ने पर किसान थियाक्लोप्रिड और लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन या नोवल्यूरॉन और इंडोक्साकार्ब आधारित कीटनाशकों का उपयोग कर सकते हैं। साथ ही 21% घुलनशील बोरॉन का छिड़काव करने से फलों का विकास बेहतर होता है, गुणवत्ता बढ़ती है और फल झड़ने की समस्या कम होती है। फसल की अंतिम सुरक्षा के लिए तुड़ाई से 10–12 दिन पहले इमामेक्टिन बेंजोएट, स्पाइनोसेड या स्पिनेटोरम का छिड़काव विशेषज्ञ की सलाह अनुसार करना लाभदायक रहेगा।

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