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किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब 50 किलो पैकेट में मिलेगी सब्सिडी वाली जैविक खाद, खेती की लागत होगी कम।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए बड़ी योजना शुरू की है। अब प्रदेश के करीब 7,500 गो आश्रय स्थलों में गोबर से बड़े स्तर पर जैविक खाद तैयार की जाएगी। सरकार इस जैविक खाद को किसानों तक सब्सिडी दर पर पहुंचाने की तैयारी कर रही है। खास बात यह है कि खाद को 50 किलो के पैकेट में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे छोटे और बड़े सभी किसानों को इसे खरीदने और इस्तेमाल करने में आसानी होगी। सरकार का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है।

किसानों की लागत होगी कम, मिट्टी बनेगी उपजाऊ

सरकार का मानना है कि जैविक खाद के उपयोग से किसानों की खेती की लागत कम होगी। रासायनिक खाद जैसे यूरिया और डीएपी पर निर्भरता घटने से किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता में भी सुधार होगा, जिससे लंबे समय तक अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ेगी। 50 किलो पैकेट में खाद उपलब्ध होने से किसानों को ढुलाई और खेत तक पहुंचाने में भी सुविधा मिलेगी। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना काफी फायदेमंद मानी जा रही है।

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गुणवत्ता जांच के बाद किसानों तक पहुंचेगी खाद

सरकार द्वारा तैयार कराई जाने वाली जैविक खाद की गुणवत्ता की जांच कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही खाद की खरीद और वितरण किया जाएगा। इससे किसानों को प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद मिलने की उम्मीद है। साथ ही बाजार में नकली और घटिया खाद की समस्या पर भी रोक लग सकेगी। सरकार चाहती है कि किसानों को भरोसेमंद और सुरक्षित जैविक उत्पाद आसानी से उपलब्ध हों।

गांवों में रोजगार और महिलाओं को मिलेगा लाभ

इस योजना से गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। गोबर से खाद बनाने, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री जैसे कार्यों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, युवाओं और पशुपालकों को इससे सीधा फायदा मिलने की संभावना है। सरकार गांव स्तर पर लोगों को प्रशिक्षण भी देगी, ताकि स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और आय के साधन विकसित किए जा सकें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

प्राकृतिक खेती और गोसंरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश सरकार अब गो आश्रय स्थलों को जैविक खाद उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने जा रही है। वर्तमान में इन गोशालाओं में करीब 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं, जिनसे मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का उपयोग जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक बनाने में किया जाएगा। सरकार ने गोसंरक्षण और इससे जुड़ी योजनाओं के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया है। आने वाले समय में यह योजना किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और गांवों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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