मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में आगामी दिनों के मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों की तैयारी अभी से शुरू करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम सामान्य रूप से शुष्क रहने और आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है। ऐसे में किसानों को खेतों की जुताई, बीज और खाद की व्यवस्था समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए, ताकि मानसून आते ही बुवाई का कार्य बिना देरी शुरू किया जा सके।
मौसम को देखते हुए खेत और जल संरक्षण पर दें ध्यान
कृषि विभाग के अनुसार जिले में अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। वहीं हवा की गति 14 से 22 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे वर्षा जल संरक्षण के लिए डबरी निर्माण, खेतों की मेड़ों की मरम्मत और जल निकासी की उचित व्यवस्था अभी से कर लें। इससे बारिश का पानी खेत में सुरक्षित रहेगा और फसल को पर्याप्त नमी मिल सकेगी।
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हरी खाद और उन्नत बीजों से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता
जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें हरी खाद के रूप में मक्का या ढैंचा की बुवाई करने की सलाह दी गई है। इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है और खरीफ फसलों की पैदावार बेहतर मिलती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ प्याज की नर्सरी तैयार करने और उन्नत किस्म के बीज समय पर खरीदने की भी सलाह दी है। सही बीज और संतुलित खाद प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी होती है।
फसलों और पशुओं को रोगों से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञों ने अरबी की फसल में पत्ती धब्बा रोग की संभावना को देखते हुए रिडोमिल दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी है। वहीं बैंगन की फसल में फल एवं तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए क्विनालफास 25 ई.सी. दवा 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सिफारिश की गई है। पशुपालकों को मानसून से पहले पशुओं का गलघोंटू, जहरी बुखार और बकरियों में पीपीआर रोग से बचाव हेतु टीकाकरण कराने की सलाह दी गई है। साथ ही हरे चारे के लिए ज्वार, मक्का और लोबिया की मिश्रित खेती को लाभकारी बताया गया है।
टिकाऊ खेती अपनाकर किसान बढ़ा सकते हैं उत्पादन और मुनाफा
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से नरवाई न जलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और जैविक तत्व बढ़ते हैं। विभाग ने किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि समय पर तैयारी, जल संरक्षण और उन्नत कृषि तकनीकों का उपयोग करके किसान खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
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