जायद सीजन किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का अच्छा अवसर माना जाता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय मूंग, उड़द, मक्का, सूरजमुखी और सब्जियों की खेती करके किसान कम समय में बेहतर उत्पादन और अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सही किस्मों का चयन और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से खेती की लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ किसानों को जायद फसलों की खेती पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
मूंग और उड़द की उन्नत किस्में देंगी अधिक उत्पादन
वैज्ञानिकों के मुताबिक मूंग की विराट, शिखा, टीजेएम-3 और हम-16 किस्मों की बुवाई 15 मई तक की जा सकती है। बुवाई से पहले बीज का रायजोबियम और पीएसबी कल्चर से उपचार करने पर अंकुरण अच्छा होता है और उत्पादन में बढ़ोतरी मिलती है। इस फसल में 4 से 5 सिंचाई पर्याप्त मानी गई है। वहीं उड़द की इंदिरा उड़द-1, टी-9 और प्रताप उड़द-1 किस्में हल्की दोमट मिट्टी में बेहतर उत्पादन देती हैं। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के लगभग 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करना जरूरी बताया गया है।
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मक्का, बेबीकॉर्न और सूरजमुखी से बढ़ सकती है किसानों की आय
जायद सीजन में मक्का की जेएम-216, एचएम-4 और संकर किस्मों की खेती भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इन फसलों में 5 से 6 सिंचाई के माध्यम से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। वहीं बेबीकॉर्न की खेती केवल 65 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी लाभ मिलता है। सूरजमुखी की केबीएसएच-44 और डीआरएसएच-1 किस्में कम पानी में तैयार हो जाती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेत के पास मधुमक्खी पालन करने से परागण बेहतर होता है और उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
सब्जियों और चारे की खेती भी बनेगी फायदे का सौदा
विशेषज्ञों ने भिंडी, लौकी, करेला और तोरई जैसी सब्जियों की संकर किस्मों को भी जायद सीजन के लिए लाभकारी बताया है। पानी की बचत और बेहतर उत्पादन के लिए ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है। पशुपालक किसानों के लिए मक्का की अफ्रीकन टॉल और ज्वार की एमपी चरी किस्में अच्छा विकल्प मानी जा रही हैं। ये फसलें करीब 45 दिनों में हरा चारा उपलब्ध करा देती हैं, जिससे पशुपालकों को कम लागत में पर्याप्त चारा मिल सकता है।
किसानों को मिल रही सरकारी सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन
कृषि विभाग द्वारा जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। मूंग और उड़द के प्रमाणित बीजों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध है। इसके अलावा ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर 55 प्रतिशत तक सब्सिडी तथा सोलर पंप पर 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कृषि यंत्रों पर भी 40 से 50 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध है। विशेषज्ञों ने किसानों से नरवाई न जलाने और उसे खेत में मिलाकर खेती करने की अपील की है। उनका मानना है कि जायद फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ लंबे समय तक खेती को लाभकारी बनाने में मदद करती हैं।
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