देश के बासमती बाजार में इस सप्ताह भी दबाव का माहौल बना रहा। कमजोर निर्यात मांग, पश्चिम एशिया में व्यापारिक अनिश्चितता और पाकिस्तान से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण बासमती धान और चावल के दाम नरम पड़े हैं। कारोबारियों के अनुसार विदेशी खरीदार फिलहाल सीमित मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे मंडियों में मांग कमजोर बनी हुई है। इसका असर हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडियों में साफ दिखाई दे रहा है।
1718 और 1509 बासमती किस्मों के दाम में गिरावट
व्यापार विशेषज्ञों के मुताबिक इस सप्ताह 1718 और 1509 जैसी प्रमुख बासमती किस्मों में गिरावट दर्ज की गई है। कई मंडियों में बासमती चावल के भाव ₹4 से ₹5 प्रति किलो तक टूटे हैं। निर्यात ऑर्डर कमजोर रहने के कारण राइस मिलर्स भी सतर्क खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में फिलहाल खरीदारों की संख्या कम है, जबकि स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया है।
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कृषि जिंस बाजार में मिला-जुला रुख
साप्ताहिक कृषि जिंस बाजार में अलग-अलग फसलों में मिश्रित रुझान देखने को मिला। बासमती धान और चावल दबाव में रहे, जबकि गेहूं सरकारी खरीद और सीमित आवक के कारण स्थिर बना रहा। मक्का में कमजोर मांग के चलते हल्की गिरावट दर्ज की गई। वहीं गैर-बासमती चावल में वैश्विक सप्लाई अधिक होने से सीमित दायरे में कारोबार हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर भारतीय बासमती बाजार पर भी पड़ रहा है।
लंबी अवधि में बासमती बाजार को लेकर उम्मीदें बरकरार
हालांकि वर्तमान में बाजार दबाव में है, लेकिन लंबी अवधि के लिए बासमती सेक्टर को सकारात्मक माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर प्रीमियम और पैकेज्ड बासमती चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योग रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले वर्षों में भारतीय बासमती बाजार में अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही निर्यात मांग में सुधार होगा, बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।
एग्री और राइस एक्सपोर्ट सेक्टर के शेयरों पर भी असर
बासमती बाजार में कमजोरी का असर एग्री और राइस एक्सपोर्ट सेक्टर से जुड़े शेयरों पर भी देखने को मिला। इस सप्ताह राइस एक्सपोर्ट कंपनियों के शेयर दबाव में कारोबार करते रहे, जबकि फूड प्रोसेसिंग और डेयरी सेक्टर में स्थिरता दिखाई दी। उर्वरक कंपनियों में मांग बढ़ने से हल्की तेजी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक निर्यात मांग मजबूत नहीं होती, तब तक राइस सेक्टर में सीमित उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। स्थानीय मंडियों में कीमतों में क्षेत्र के अनुसार अंतर संभव है।
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