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गर्मियों में हरे चारे की टेंशन खत्म, इस देसी तकनीक से बनाएं सस्ता और पोषक पशु आहार।

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गर्मियों में हरे चारे की कमी और महंगे पशु आहार की वजह से पशुपालकों की परेशानी बढ़ जाती है। इसका असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर भी पड़ता है। ऐसे समय में किसान सूखे भूसे का यूरिया उपचार करके कम लागत में पौष्टिक चारा तैयार कर सकते हैं, जिसे सालभर इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक सस्ती और काफी फायदेमंद मानी जाती है।

यूरिया उपचारित भूसा क्यों है फायदेमंद

सामान्य गेहूं और धान के भूसे में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे पशुओं को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। लेकिन यूरिया उपचार के बाद भूसे की पौष्टिकता बढ़ जाती है और उसमें प्रोटीन की मात्रा लगभग दोगुनी हो सकती है। इससे भूसा मुलायम और स्वादिष्ट हो जाता है, जिसे पशु आसानी से खाते हैं। इसकी पाचन क्षमता भी बेहतर हो जाती है।

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दूध उत्पादन और खर्च दोनों पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार यूरिया उपचारित भूसा खिलाने से पशुओं को बेहतर पोषण मिलता है, जिससे दूध उत्पादन में सुधार हो सकता है। साथ ही महंगे दाने और सघन आहार की जरूरत भी कम हो जाती है। इससे पशुपालकों की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ सकता है। गर्मियों में जब हरा चारा कम मिलता है, तब यह तकनीक काफी राहत देती है।

ऐसे करें भूसे का यूरिया उपचार

भूसे का उपचार घर या खेत में आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए 4 किलो यूरिया को 40 लीटर पानी में घोल लें। अब 1 क्विंटल सूखे भूसे की परत बिछाकर उस पर घोल का छिड़काव करें। इसी तरह कई परतें लगाकर पूरे ढेर को प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढक दें। गर्मियों में इसे करीब 3 सप्ताह तक बंद रखें। इस दौरान भूसा अधिक पौष्टिक और मुलायम बन जाता है।

पशुओं को खिलाते समय रखें ध्यान

उपचार पूरा होने के बाद भूसे को कुछ देर खुली हवा में रखने के बाद ही पशुओं को खिलाएं। शुरुआत में कम मात्रा से शुरुआत करें। ध्यान रखें कि यूरिया कभी भी सीधे पशुओं को न दें और उपचारित भूसे का इस्तेमाल कम से कम 3 सप्ताह बाद ही करें।

पशुपालकों के लिए फायदेमंद तकनीक

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरिया उपचारित भूसा कम खर्च में पशुपालन को ज्यादा लाभकारी बना सकता है। इससे पशुओं को बेहतर पोषण मिलता है, दूध उत्पादन बढ़ता है और सालभर चारे की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

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