कटहल की खेती में छोटे-छोटे फलों का बार-बार गिरना किसानों के लिए एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण फफूंद जनित संक्रमण होता है, जो हवा के जरिए कोमल फलों पर हमला करता है। संक्रमित फल धीरे-धीरे काले पड़ने लगते हैं और अंत में पेड़ से गिर जाते हैं। कई बार कीट भी फलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उनमें छेद हो जाता है और दूध जैसा पदार्थ निकलने लगता है—यह स्थिति फफूंद के फैलाव को और तेज कर देती है।
सही छिड़काव तकनीक से पाएं बेहतर नियंत्रण
कटहल का पेड़ आकार में बड़ा होता है और इसके फल तनों व मोटी शाखाओं पर भी लगते हैं, इसलिए साधारण छिड़काव पर्याप्त नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए लंबी नली वाले स्प्रेयर का उपयोग करना चाहिए, जिससे दवा पेड़ के हर हिस्से तक सही तरीके से पहुंच सके। सही तकनीक से किया गया छिड़काव फफूंद के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है और फलों को गिरने से बचाता है।
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फफूंद नियंत्रण के लिए कारगर उपाय
कटहल में फलों के गिरने की समस्या को रोकने के लिए बोर्डो मिश्रण एक भरोसेमंद और प्रभावी उपाय माना जाता है। यह पारंपरिक दवा आज भी उतनी ही कारगर है, बस इसे सही अनुपात में तैयार करना जरूरी है। छिड़काव के साथ-साथ इसे पेड़ के तनों पर लेप के रूप में लगाने से संक्रमण पर बेहतर नियंत्रण मिलता है और फलों की सुरक्षा बढ़ती है।
वैकल्पिक दवा और उपयोग का सही तरीका
अगर बोर्डो मिश्रण उपलब्ध न हो, तो ताम्रयुक्त फफूंदनाशी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 2 ग्राम दवा को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। यह प्रक्रिया हर 15 दिनों के अंतराल पर कम से कम दो बार करनी चाहिए, जिससे रोग का प्रभाव धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और फल गिरने की समस्या कम हो जाती है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
कटहल की अच्छी पैदावार के लिए समय पर रोग की पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी है। खेत की नियमित निगरानी करें, कीटों पर नियंत्रण रखें और संतुलित पोषण दें। सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान न केवल फलों के गिरने की समस्या को रोक सकते हैं, बल्कि उत्पादन और मुनाफा भी बढ़ा सकते हैं।
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