kisan news : रबड़ की खेती से किसान होंगे मालामाल, जानें, पूरी जानकारी

रबड़ की खेती : रबड़ की खेती करके किसान अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। भारत रबड़ उत्पादन के मामले में विश्व में चौथे स्थान पर है। भारत में केरल सबसे ज्यादा रबड़ का उत्पादन करने वाला राज्य है। केरल के साथ ही भारत के अन्य राज्यों में भी रबड़ की खेती की जाती है। रबड़ का उपयोग करके उपयोग गाडि़यों के टायर और ट्यूबों के बनाने में तथा जूतों के तले और एड़ियाँ, बिजली के तार, खिलौने, बरसाती कपड़े, चादरें, खेल के सामान, बोतलों और बरफ के थैलों, सरजरी के सामान, टायर, इंजन की सील, गेंद, इलास्टिक बैंड व इलेक्ट्रिक उपकरणों इत्यादि को बनाने में भी किया जाता है। कोरोना जैसी महामारी में रबड़ का उपयोग करके पीपीटी किट भी बनाई गई थी। इसीलिए भारत के साथ-साथ विश्व में रबड़ की डिमांड दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। किसान भाइयों आज हम ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट के माध्यम से आपके साथ रबड़ की खेती से जुड़ी सभी जानकारी साझा करेंगे।

विश्व में रबड़ की खेती करने वाले प्रमुख देशों में थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, भारत, चीन तथा श्रीलंका है। भारत का रबड़ के उत्पादन में विश्व में चौथा स्थान है। भारत में रबड़ की खेती करने वाले प्रमुख राज्य केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक हैं।

रबड़ की खेती करने के लिए अनुकूल जलवायु

रबड़ का पौधा मुख्य तौर पर दक्षिण पूर्व एशिया में उष्ण कटिबंधीय जलवायु वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। रबड़ की खेती करने के लिए 25 से 30 डिग्री का तापमान उपयुक्त होती हैं और 150 से 200 सेंटीमीटर की वर्षा रबड़ की खेती करने के लिए उपयुक्त होती हैं।

रबड़ की खेती करने के लिए उपयुक्त मिट्टी

रबड़ की खेती करने के लिए लेटेराइट युक्त लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच मान 4.5 से 6.0 के बीच का होना चाहिए।

रबड़ की खेती करने के लिए खेत की तैयारी कैसे करें

खेत में गड्ढ़ों को तैयार करने से पहले खेत की कल्टीवेटर की मदद से गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी कर लेनी चाहिए। उसके बाद  पाटा लगाकर खेत को समतल करना आवश्यक होता है। पाटा लगाने से खेत समतल हो जाता हैं जिससे खेत की सिंचाई करने में आसानी होती हैं

रबड़ की खेती करने के लिए उन्नत किस्में

रबड़ की कुछ उन्नत किस्में हैं- तजीर 1, पीबी 86, बीडी 5, बीडी 10, पीआर 17, जीटी 1, आरआरआईआई 105, आरआरआईएम 600, पीबी 59, पीबी 217, पीबी 235, आरआरआईएम 703, आरआरआईआई 5, पीसीके-1, 2 और पीबी 260 आदि हैं।

रबड़ के पौधों की रोपाई कैसे करें

रबड़ की खेती करते समय खेत की तैयारी करने के बाद रबड़ की पौधों की रोपाई गड्ढ़ों में की जाती हैं। इसके लिए खेत में एक गड्ढ़े से दूसरे गड्ढ़े के बीच 3 मीटर की दूरी रखना आवश्यक होता हैं। गड्ढ़े एक फीट चौड़े और एक फीट गहरे होने चाहिए। सभी गड्ढ़ों को एक कतार में तैयार करें। इसके साथ ही पौधों की रोपाई के समय मिट्टी के अनुसार कृषि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर जैविक खाद एवं रासायनिक उर्वरक जैसे पोटाश, नाइट्रोजन और फॉस्फोरस का उचित मात्रा में प्रयोग करें। रबड़ की पौधों की रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई अवश्य कर दे।

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पौधे से रबड़ कैसे बनता है

  • रबड़ के पौधे से रबड़ को बनाने के लिए उसके पेड़ के तनों में छेद कर पेड़ से निकलने वाले दूध (लेटेक्स) को इकट्ठा कर लिया जाता है।
  • दूध (लेटेक्स) को इकट्ठा करने के बाद इस लेटेक्स का केमिकल्स के साथ परीक्षण करते है, ताकि अच्छी गुणवत्ता वाला रबड़ प्राप्त हो सके।
  • इसके बाद लेटेक्स को गाढ़ा होने के लिए रख देते है, लेटेक्स में मौजूद पानी के सूख जाने के बाद केवल रबड़ ही रह जाता है।
  • रबड़ के पेड़ से निकलने वाले दूध (लेटेक्स) पानी से भी हल्का होता है, जिसमें रबड़ के अलावा शर्करा, प्रोटीन, रेज़िन, खनिज लवण और एंजाइम्स भी पाया जाता है।
  • रबड़ में इतना लचीला पन पाया जाता है, जिससे रबड़ अपने आकार से 8 गुना तक लंबा हो सकता है, रबड़ के इसी गुण की वजह से रबड़ के जूते, गेंद और गुब्बारे जैसी वस्तुओं को बनाया जाता है।

source by – tractorjunction

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