कृमि खाद बिजनेस 2023: केंचुआ खाद का बिजनेस कर कमाएं लाखों रूपए, फ्री में मिल रहीं ट्रैनिंग

ऑर्गेनिक फार्मिंग यानी जैविक खेती मिट्टी और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक फसल उत्पादन के लिए ज़रूरी है और जैविक खेती में सबसे बड़ी ज़रूरत है वर्मीकम्पोस्ट। जानिए कैसे डॉ. श्रवण कुमार वर्मीकम्पोस्ट व्यवसाय को लेकर ट्रेनिंग दे रहे हैं। Vermicompost (केंचुआ खाद / वर्मीकम्पोस्ट) ज़्यादा उत्पादन के चक्कर में जिस तरह तेज़ी से रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों का इस्तेमाल पिछले कुछ दशकों में हुआ है, उसका असर धीरे-धीरे पर्यावरण और इंसानों की खराब सेहत के रूप में दिखने लगा है। यही वजह है कि धीरे-धीरे लोग ऑर्गेनिक चीज़ों की मांग कर रहे हैं और किसान भी जैविक खेती को अपनाने लगे हैं। मगर जैविक खेती से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है कि खाद भी पूरी तरह से जैविक और पौष्टिक हो। ऐसी ही खाद है केंचुआ खाद।

वर्मीकम्पोस्ट बेहतरीन जैविक खाद है जो किचन, पशु फ़ार्म के कचरे और केंचुए की मदद से तैयार की जाती है। केंचुआ खाद (Vermicompost) को व्यवसाय के रूप में अपनाकर जहां युवा अच्छा ख़ासा मुनाफ़ा कमा सकते हैं, वहीं किसानों की खाद की ज़रूरत भी पूरी होगी, लेकिन इसके लिए युवाओं को Vermicompost बनाने का सही तरीका पता होना ज़रूरी है।

ऐसे में डॉ. श्रवण कुमार यादव (Shravan Yadav) उनकी मदद कर रहे हैं। वो पिछले 2 साल में करीब 40 हज़ार युवाओं को केंचुआ खाद (Vermicompost) बनाने की ट्रेनिंग दे चुके हैं। ये युवा अब अपना खुद का Vermicompost व्यवसाय चला रहे हैं। डॉ. श्रवण कुमार हर महीने की 25 तारीख को युवाओं को फ़्री में ट्रेनिंग देते हैं। डॉ. श्रवण कुमार यादव से केंचुआ खाद (Vermicompost) व्यवसाय के बारे में विस्तार से चर्चा की किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली ने।

ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग में पीएचडी

डॉ. श्रवण यादव ने MSc और PhD दोनों ही ऑर्गेनिक फार्मिंग से की हैं और इस फ़ील्ड में वो अपने पिता के काम को ही आगे बढ़ा रहे हैं। दरअसल, उनके पिता को मार्च 2022 में जैविक खेती में सराहनीय कार्य के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री की ओर से बेस्ट ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग का अवॉर्ड मिल चुका है। श्रवण यादव अपने पिता के काम को ही आगे बढ़ा रहे हैं। श्रवण यादव को भी उनके बेहतरीन काम के लिए IARI बेस्ट इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड से नवाज़ा गया है।

शुरू किया खुद का काम

डॉ. श्रवण ने बताया कि 13 सालों तक ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग पर रिसर्च के बाद उन्होंने अपनी खुद की Vermi Compost Unit शुरू कर केंचुआ खाद (Vermicompost) व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में उन्हें बहुत सामाजिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसे पार करते हुए उन्होंने 17 बेड से 1100 बेड का सफ़र तय किया। दरअसल, डॉ. श्रवण ने अपने केंचुआ खाद (Vermicompost) व्यवसाय की शुरुआत 17 बेड से की थी और आज वो केंचुआ खाद (Vermicompost) बनाने वाली देश की सबसे बड़ी फ़र्म बन गए हैं, जिसके पास 1100 बेड हैं। Dr. Organic वर्मीकम्पोस्ट फ़ार्म नाम से उनका ब्रांड है।

कई मेथड पर करते हैं काम

वो न सिर्फ़ युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं, बल्कि किसानों को किफ़ायती दर पर वर्मीकम्पोस्ट भी उपलब्ध करा रहे हैं। वो प्रति किलो 2500 केंचुए देते हैं। केंचुए Vermicompost के लिए बहुत ज़रूरी है। डॉ. यादव का कहना है कि उनकी केंचुआ खाद (Vermicompost) इकाई का इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत किफ़ायती है।वो यहां अलग-अलग मेथड पर काम करते हैं।जो तरीका सबसे किफ़ायती और लाभदायक लगता है वो किसानों और युवाओं को बताते हैं। केंचुआ खाद (Vermicompost) के अलावा वो वर्मीवॉश भी उपलब्ध करवाते हैं। ये प्लांट प्रमोटर का काम करता है। इसे स्प्रे करने से पौधों का विकास अच्छा होता है।

क्या है वर्मीकम्पोस्ट?

केंचुआ खाद (Vermicompost) एक बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद है, इसे केंचुआ खाद भी कहा जाता है। ये किचन के कचरे, गोबर और केंचुएं की मदद से बनाई जाती है। इसे तैयार होने में करीब 45 दिन लगते हैं। इसकी ख़ासियत है कि रासायनिक खाद की तरह ये पर्यावरण को दूषित नहीं करता और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है। दरअसल, इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश भरपूर मात्रा में होता है, जो फसल का उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।