ICAR-National Soybean Research Institute ने पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्वी पहाड़ी राज्यों के किसानों के लिए सोयाबीन की कई उन्नत किस्मों की अनुशंसा की है। संस्थान का कहना है कि इन किस्मों को इन क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखकर चुना गया है, ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा मिल सके। यह फैसला खासतौर पर खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए काफी फायदेमंद माना जा रहा है।
इन राज्यों के किसानों को मिलेगा नई किस्मों का फायदा
संस्थान द्वारा जारी जानकारी के अनुसार पूर्वी क्षेत्र में छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए इन किस्मों की सिफारिश की गई है। वहीं उत्तर-पूर्वी राज्यों में असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम के किसान भी इन उन्नत सोयाबीन किस्मों का लाभ उठा सकेंगे। इन क्षेत्रों में मौसम और भूमि की स्थिति अलग होने के कारण विशेष किस्मों का चयन किया गया है, ताकि फसल की पैदावार बेहतर हो सके।
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इन सोयाबीन किस्मों को किया गया अनुशंसित
आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान द्वारा RSC 11-35, RSC 10-71, RSC 10-52, बिरसा सोया-4, MACS 1407, MACS 1460, NRC 128, RSC 11-07 और RSC 10-46 जैसी किस्मों की अनुशंसा की गई है। इन किस्मों को बेहतर उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करने के आधार पर चुना गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन उन्नत किस्मों से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
झारखंड के किसानों के लिए खास है बिरसा सोया-4
संस्थान ने बिरसा सोया-4 किस्म को विशेष रूप से झारखंड के किसानों के लिए उपयुक्त बताया है। यह किस्म वहां की जलवायु और मिट्टी के अनुसार बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सही किस्म का चयन किसानों की पैदावार और मुनाफे दोनों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसार ही बीज का चुनाव करने की सलाह दी गई है।
किसानों को प्रमाणित बीज उपयोग करने की सलाह
ICAR और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्रमाणित बीजों का उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही किसानों से कहा गया है कि वे स्थानीय कृषि विभाग की सलाह और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती करें। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आने वाले खरीफ सीजन में इन उन्नत किस्मों के जरिए किसानों को अच्छी पैदावार और बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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