धान की खेती करने वाले किसानों के लिए पूसा बासमती 1728 एक बेहतरीन और अधिक उत्पादन देने वाली बासमती धान की किस्म है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित किया गया है। यह किस्म पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सिंचित क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित है। बेहतर गुणवत्ता वाले दानों और अच्छी पैदावार के कारण यह किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
सिंचित खेती के लिए उपयुक्त किस्म
पूसा बासमती 1728 को सिंचित रोपाई वाली खेती के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म को पूरे फसल चक्र के दौरान नियमित पानी की आवश्यकता होती है। इसकी फसल बुवाई के लगभग 140 से 145 दिनों बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ केवल 5 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है, जबकि रोपाई के लिए 20 सेमी × 20 सेमी की दूरी रखने की सलाह दी जाती है, जिससे पौधों का बेहतर विकास होता है।
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प्रति एकड़ 20 से 24 क्विंटल तक उत्पादन
यह किस्म किसानों को शानदार उत्पादन देने की क्षमता रखती है। सामान्य परिस्थितियों में पूसा बासमती 1728 से 20 से 24 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज प्राप्त की जा सकती है, जो लगभग 5 से 6 टन प्रति हेक्टेयर के बराबर है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन और सही कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान इससे और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
बैक्टीरियल ब्लाइट रोग के प्रति प्रतिरोधी
धान की फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट एक प्रमुख और नुकसानदायक बीमारी मानी जाती है। पूसा बासमती 1728 इस रोग के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे किसानों को फसल सुरक्षा पर कम खर्च करना पड़ता है। रोग प्रतिरोधी होने के कारण फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही, रासायनिक दवाओं का कम उपयोग होने से बेहतर गुणवत्ता का धान प्राप्त होता है।
किसानों के लिए लाभदायक विकल्प
अधिक उपज, बेहतर दाना गुणवत्ता और रोग प्रतिरोध जैसी विशेषताओं के कारण पूसा बासमती 1728 किसानों के लिए एक लाभदायक बासमती धान की किस्म साबित हो रही है। उत्तर भारत के सिंचित क्षेत्रों में इसकी खेती किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा दिलाने में मदद कर सकती है। यदि किसान उन्नत और भरोसेमंद बासमती धान की किस्म की तलाश में हैं, तो पूसा बासमती 1728 एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
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