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अब दक्षिण भारत में बढ़ेगी सोयाबीन की पैदावार, ICAR ने किसानों के लिए सुझाईं नई हाई यील्ड किस्में।

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आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने दक्षिण भारत के किसानों के लिए सोयाबीन की कई उन्नत किस्मों की अनुशंसा की है। संस्थान द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के दक्षिणी क्षेत्रों में खेती करने वाले किसान इन किस्मों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। बदलते मौसम और खेती की बढ़ती लागत के बीच सही किस्म का चयन किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दक्षिण भारत के लिए अनुशंसित सोयाबीन किस्में

संस्थान की ओर से जारी सूची में ALSB 50, MAUS 725, फुले दुर्वा (KDS 992), NRCMACS 1667, NRC 142, MACS 1460, NRC 132, DSb 34, KDS 753 (फुले किमाया) और KBS 23 जैसी उन्नत किस्मों को शामिल किया गया है। इन किस्मों को दक्षिण भारत की जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए अनुशंसित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये किस्में किसानों को अच्छी उपज देने के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता भी प्रदान कर सकती हैं।

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तेलंगाना और कर्नाटक के लिए खास सिफारिश

आईसीएआर द्वारा जारी जानकारी के अनुसार ALSB 50 किस्म को विशेष रूप से तेलंगाना के किसानों के लिए उपयुक्त माना गया है। वहीं KBS 23 किस्म को कर्नाटक के लिए अनुशंसित किया गया है। इन किस्मों की खासियत यह है कि ये स्थानीय जलवायु परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। सही बीज चयन से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

किसानों को प्रमाणित बीज उपयोग करने की सलाह

संस्थान ने किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तायुक्त बीजों का ही उपयोग करने की सलाह दी है। इसके साथ ही किसानों को क्षेत्रीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बुवाई, सिंचाई और पोषण प्रबंधन करने के लिए कहा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार सही तकनीक और अनुशंसित किस्मों के उपयोग से सोयाबीन की खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।

बेहतर उत्पादन और मुनाफे की उम्मीद

दक्षिण भारत में सोयाबीन की खेती लगातार बढ़ रही है और ऐसे में उन्नत किस्मों का चयन किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। आईसीएआर द्वारा अनुशंसित ये किस्में किसानों को बेहतर उत्पादन, अच्छी गुणवत्ता और अधिक मुनाफा दिलाने में मदद कर सकती हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें, तो आने वाले समय में दक्षिण भारत में सोयाबीन उत्पादन में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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