बिहार में मई महीने के दूसरे पखवाड़े में अचानक बढ़ी भीषण गर्मी ने आम जनजीवन के साथ खेती-किसानी पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। महीने की शुरुआत में जहां मौसम सामान्य बना हुआ था, वहीं अब राज्य के कई जिलों में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। लगातार चल रही गर्म हवाओं और हीट वेव जैसी स्थिति ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासकर खरीफ सीजन से पहले धान की नर्सरी तैयार कर रहे किसान सबसे ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं।
इन जिलों में 44 डिग्री तक पहुंचा तापमान
कैमूर, रोहतास, भोजपुर, बक्सर, औरंगाबाद और छपरा जैसे जिलों में लगातार तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग सुबह के बाद घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर किसान धान की नर्सरी डालने की तैयारी में जुटे हुए हैं, लेकिन तेज धूप और गर्म हवाएं धान के अंकुरण और पौधों की शुरुआती बढ़वार के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो नर्सरी को नुकसान हो सकता है।
महिलाओं के लिए राहत भरी खबर! सरकार ने खोला खजाना, जल्द मिलेगा 3000 रुपये का लाभ।
धान की नर्सरी के लिए 30 से 35 डिग्री तापमान सबसे बेहतर
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार धान की नर्सरी के लिए 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। लेकिन फिलहाल बिहार के कई जिलों में तापमान सामान्य से 7 से 8 डिग्री ज्यादा चल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक गर्मी के कारण बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है और पौधों की वृद्धि धीमी पड़ सकती है। ऐसे में किसानों को नर्सरी की देखभाल में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि खरीफ सीजन की शुरुआत में नुकसान से बचा जा सके।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए जरूरी सुझाव
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि धान की नर्सरी ऐसी जगह तैयार करें जहां पेड़ों या बगीचों की हल्की छाया मिल सके। इसके अलावा नर्सरी शाम के समय डालना ज्यादा फायदेमंद माना गया है, क्योंकि दिन में मिट्टी का तापमान काफी अधिक रहता है। सिंचाई भी सुबह जल्दी या शाम को करनी चाहिए ताकि पौधों पर गर्म पानी का असर न पड़े। वैज्ञानिकों ने खेत में लगातार नमी बनाए रखने की सलाह दी है, जिससे अंकुरण बेहतर तरीके से हो सके और पौधे स्वस्थ रहें।
सही समय और सही तकनीक से बच सकता है नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की नर्सरी डालने से पहले खेत की अच्छी तैयारी करना बेहद जरूरी है। खेत में गोबर खाद, पोटाश, डीएपी, यूरिया और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलाकर अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। लंबी अवधि वाले धान की नर्सरी 25 से 31 मई के बीच डालना बेहतर माना गया है, जबकि मध्यम और कम अवधि वाले धान की बुवाई जून महीने में करना सही रहेगा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नौतपा शुरू होने के बाद तापमान और बढ़ सकता है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही खेती करनी चाहिए। सही तकनीक अपनाकर किसान भीषण गर्मी के बीच भी धान की अच्छी नर्सरी तैयार कर सकते हैं और खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
किसानों के लिए सुनहरा मौका, आम-अमरूद के बगीचे और सिंचाई योजनाओं हेतु ऑनलाइन पंजीयन शुरू।





