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आम की खेती का नया सुपरहिट मॉडल! कम जगह में ज्यादा पेड़ और भरपूर फल से किसान हुए हैरान।

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महाराष्ट्र के जलगांव स्थित Jain Irrigation Systems Limited के जैन हिल्स परिसर में इस वर्ष अल्ट्रा हाई डेंसिटी मैंगो प्लांटेशन मॉडल के तहत लगाए गए आम के बागों में शानदार बहार देखने को मिल रही है। यहां केसर, सोनपरी, मल्लिका और तोतापरी जैसी उन्नत किस्मों के पौधों पर बेहतर फ्लावरिंग और फल धारण ने किसानों को काफी प्रभावित किया है। आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए इन बागों ने कम जमीन में अधिक उत्पादन की नई संभावनाएं दिखाईं हैं।

कम दूरी पर पौध लगाकर बढ़ाया जा रहा उत्पादन

मध्यप्रदेश के कई जिलों से पहुंचे किसानों ने इस आधुनिक बागवानी मॉडल का भ्रमण किया और अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटेशन (UHDP) तकनीक को करीब से समझा। विशेषज्ञों के अनुसार इस पद्धति में पौधों को सामान्य बागों की तुलना में कम दूरी पर लगाया जाता है, जिससे प्रति एकड़ पौधों की संख्या बढ़ जाती है और शुरुआती वर्षों से ही अधिक उत्पादन मिलने लगता है। इस तकनीक को आम की खेती में भविष्य की वैज्ञानिक और लाभकारी पद्धति माना जा रहा है।

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ड्रिप सिंचाई और प्रूनिंग से मिल रहा बेहतर परिणाम

एग्रोनॉमिस्ट Azhar Zaidi ने बताया कि इस मॉडल में आमतौर पर पौधों की दूरी 3×2 मीटर या 4×2 मीटर रखी जाती है। पौधों की ऊंचाई और फैलाव नियंत्रित रखने के लिए नियमित प्रूनिंग और कैनोपी मैनेजमेंट बेहद जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन प्रणाली के जरिए पानी और घुलनशील उर्वरकों को सीधे जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों का विकास संतुलित तरीके से होता है।

संतुलित पोषण और रोग प्रबंधन पर दिया जा रहा जोर

विशेषज्ञों के अनुसार आम में बेहतर बहार और फल धारण के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन जरूरी है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ जिंक, बोरॉन और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग फ्लावरिंग और फ्रूट सेटिंग में मदद करता है। वहीं पाउडरी मिल्ड्यू, एन्थ्रेक्नोज और आम के हॉपर जैसे रोग एवं कीटों की समय पर निगरानी भी आवश्यक मानी गई है। मल्चिंग और जैविक पदार्थों के उपयोग से मिट्टी की नमी और उर्वरता बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।

किसानों ने बताया भविष्य की लाभकारी तकनीक

भ्रमण में शामिल हरदा, खरगोन और बड़वानी के किसानों ने इस तकनीक से तैयार आम के बागों को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया। किसानों का कहना है कि कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता देने वाली यह तकनीक आने वाले समय में आम की खेती को नई दिशा दे सकती है। कई किसानों ने अपने क्षेत्रों में भी अल्ट्रा हाई डेंसिटी मॉडल अपनाने की इच्छा जताई और इसे आधुनिक, वैज्ञानिक एवं लाभकारी बागवानी पद्धति बताया।

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