उत्तर प्रदेश में पशुपालकों और किसानों को सालभर हरा और पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने के लिए पशुधन विभाग बड़े स्तर पर काम कर रहा है। सरकार की ओर से नेपियर घास, बरसीम और ज्वार चारा बीज का वितरण किया जा रहा है ताकि पशुओं के लिए पोषणयुक्त चारा आसानी से उपलब्ध हो सके। इससे पशुपालकों की चारे पर होने वाली लागत कम होगी और दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में हरे चारे की कमी को दूर कर पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाना है।
नेपियर घास की खेती पर सरकार का सबसे ज्यादा फोकस
पशुपालन विभाग इस समय नेपियर घास की खेती को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार नेपियर घास की खासियत यह है कि इसकी कटाई सालभर में लगभग छह बार तक की जा सकती है, जिससे पशुपालकों को लगातार हरा चारा मिलता रहता है। यही कारण है कि इसे पशुओं के लिए सबसे बेहतर हरे चारे के विकल्पों में माना जा रहा है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में हरा चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि पर्याप्त हरा चारा मिलने से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा और दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।
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किसानों को बांटे जा रहे बीज और नेपियर रूट स्लिप
अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम के तहत किसानों और पशुपालकों को बरसीम तथा ज्वार चारा बीज वितरित किए गए हैं। विभाग के अनुसार इससे करीब 4,156 हेक्टेयर क्षेत्र में हरे चारे की खेती होने का अनुमान है। इसके अलावा इस साल 230 हेक्टेयर क्षेत्र में नेपियर घास की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार द्वारा प्रदेशभर में करीब 60 लाख नेपियर रूट स्लिप किसानों को वितरित की जा चुकी हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 4 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस खेती को अपनाने के लिए आगे आएं।
गोचर भूमि और गोशालाओं में भी बढ़ेगा हरा चारा उत्पादन
राज्य सरकार केवल किसानों के खेतों तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि गोचर भूमि और गो आश्रय स्थलों पर भी बड़े पैमाने पर हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके तहत ज्वार, मक्का और बाजरा जैसी फसलों के बीज वितरित किए जा रहे हैं ताकि इन्हें पशुओं के हरे चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की गोशालाओं और पशुपालकों को सालभर पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध हो सके, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और दूध उत्पादन में वृद्धि हो।
किसानों को आधुनिक चारा उत्पादन की दी जा रही ट्रेनिंग
पशुधन विभाग किसानों को केवल बीज ही नहीं दे रहा, बल्कि आधुनिक तरीके से हरा चारा उत्पादन करने की ट्रेनिंग भी दे रहा है। इसके लिए हर जिले से अधिकारियों को भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी में प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद यही अधिकारी किसानों और पशुपालकों को नई तकनीकों की जानकारी देंगे। साथ ही किसानों को तकनीकी संस्थानों और विभागीय प्रक्षेत्रों का एक्सपोजर विजिट भी कराया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में प्रदेश में हरे चारे की समस्या काफी हद तक कम होगी और पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
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