न्यूज़ खेतीबाड़ी टेक्नोलॉजी बिजनेस मनोरंजन ऑटोमोबाइल मंडी भाव स्वास्थ्य

किसान ध्यान दें! सोयाबीन में ज्यादा यूरिया डालना पड़ सकता है भारी, ऐसे करें सही खेती।

By
On:
Follow Us

देश के कई राज्यों में सोयाबीन किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही बन चुकी है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन पहले जैसा ही अटका हुआ है। किसान अच्छी बारिश होने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक पैदावार नहीं ले पा रहे हैं। कई क्षेत्रों में किसान 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन की उम्मीद रखते हैं, लेकिन वास्तविक उपज 8 से 10 क्विंटल तक ही सीमित रह जाती है। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर खेती में कमी कहाँ रह जा रही है।

जरूरत से ज्यादा यूरिया डालना बन रहा नुकसान की बड़ी वजह

राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन में जरूरत से ज्यादा यूरिया डालना उत्पादन घटने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। कई किसान ज्यादा हरी फसल और तेज बढ़वार के लिए 2 से 3 बोरी यूरिया तक डाल देते हैं, जबकि सोयाबीन दलहनी फसल होने के कारण वातावरण से नाइट्रोजन लेने की क्षमता रखती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रति हेक्टेयर लगभग 56 किलो यूरिया पर्याप्त माना जाता है। अधिक यूरिया डालने से पौधे पत्तेदार तो बनते हैं, लेकिन फलियां कम लगती हैं और रोग व कीटों का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने और फॉस्फोरस, पोटाश व सल्फर पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

खेतों में मजदूरी करने वालों के लिए खुशखबरी, कम पैसे जमा कर हर महीने मिलेगी 3000 रुपये की पक्की पेंशन।

बिना बीजोपचार और गलत खेती तरीके घटा रहे उत्पादन

विशेषज्ञों का कहना है कि कई किसान बिना बीजोपचार के सीधे बोवनी कर देते हैं, जिससे बीज शुरुआती अवस्था में ही फफूंद, तना मक्खी, दीमक और जड़ सड़न जैसी समस्याओं का शिकार हो जाते हैं। वैज्ञानिकों ने बोवनी से पहले बीजोपचार को अनिवार्य बताया है। इसके अलावा गलत दूरी पर बुवाई और जरूरत से ज्यादा बीज दर भी उत्पादन कम करने का बड़ा कारण बन रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार सीधी बढ़वार वाली किस्मों में 30 सेंटीमीटर और फैलाव वाली किस्मों में 45 सेंटीमीटर कतार दूरी रखना बेहतर माना गया है। इससे पौधों को पर्याप्त रोशनी और पोषण मिल पाता है।

नरवाई जलाना और खरपतवार नियंत्रण में देरी पड़ रही भारी

कई किसान गेहूं कटाई के बाद खेत की नरवाई जला देते हैं ताकि जल्दी खेत तैयार हो सके, लेकिन इससे मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव खत्म हो जाते हैं और जैविक कार्बन कम होने लगता है। वैज्ञानिकों ने नरवाई जलाने के बजाय रोटावेटर और वेस्ट डीकम्पोजर के उपयोग की सलाह दी है। वहीं खरपतवार नियंत्रण में देरी भी किसानों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। सोयाबीन की शुरुआती 40 दिन की अवस्था सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि इस दौरान खेत खरपतवार से साफ नहीं रखा गया, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों ने सही समय पर खरपतवारनाशी उपयोग करने और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेने की बात कही है।

अब वैज्ञानिक खेती अपनाना ही बनेगा ज्यादा उत्पादन का रास्ता

राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी है। संस्थान के अनुसार बीजोपचार, संतुलित खाद प्रबंधन, सही दूरी पर बुवाई, प्रमाणित बीज और अनुशंसित किस्मों का उपयोग करके उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। साथ ही किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर भी ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल बारिश के भरोसे और पुराने तरीकों से खेती करने पर ज्यादा उत्पादन लेना मुश्किल हो गया है। यदि किसान आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं, तो लागत कम करने के साथ सोयाबीन की पैदावार और मुनाफा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।

अब बस्तर में आएगा विकास का नया दौर, आदिवासी महिलाओं को मिलेंगी गाय-भैंस और कमाई का बड़ा मौका।

For Feedback - feedback@example.com

Related News

Leave a Comment