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अगर चाहिए बेहतर गुणवत्ता वाली बासमती फसल, तो इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 हो सकती है आपके लिए सही विकल्प।

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भारत में बासमती धान की खेती करने वाले किसानों के लिए इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 एक महत्वपूर्ण और उन्नत किस्म मानी जाती है। इसे ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली और राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (NRCPB) के सहयोग से विकसित किया गया था। वर्ष 2007 में जारी की गई यह किस्म भारत में आणविक प्रजनन तकनीक से विकसित होने वाली पहली चावल किस्म होने का गौरव रखती है।

बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट रोग से बेहतर सुरक्षा

पूसा बासमती 1 की लोकप्रियता उसके उत्कृष्ट दाना गुणों और सुगंध के कारण थी, लेकिन यह बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट रोग से प्रभावित हो सकती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने आधुनिक मार्कर-असिस्टेड सिलेक्शन तकनीक का उपयोग कर इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 विकसित की। यह किस्म बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट रोग के प्रति बेहतर प्रतिरोध प्रदान करती है, जिससे किसानों को फसल नुकसान का जोखिम कम होता है।

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दाने की गुणवत्ता और सुगंध में शानदार

इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 में पारंपरिक बासमती की सभी प्रमुख विशेषताएं मौजूद हैं। इसके दाने लंबे, पतले और आकर्षक होते हैं तथा पकने के बाद बेहतरीन बनावट और तेज बासमती सुगंध प्रदान करते हैं। इसकी गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि यह घरेलू उपभोग के साथ-साथ निर्यात बाजार की आवश्यकताओं को भी आसानी से पूरा करती है।

आधुनिक बासमती किस्मों के विकास की बनी नींव

यह किस्म केवल किसानों के लिए ही नहीं बल्कि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में भी एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई। इसके आधार पर बाद में पूसा बासमती 1637, पूसा बासमती 1847, पूसा बासमती 1885 और पूसा बासमती 1886 जैसी कई उन्नत और रोग प्रतिरोधी बासमती किस्मों का विकास किया गया। इस कारण इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 को भारतीय बासमती अनुसंधान की आधारशिला भी माना जाता है।

इन राज्यों के किसानों के लिए उपयुक्त विकल्प

इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 की खेती पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के बासमती उत्पादक क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है। बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता, उत्कृष्ट दाना गुणवत्ता, सुगंध और बाजार में अच्छी मांग के कारण यह किस्म किसानों को अधिक लाभ दिलाने वाली भरोसेमंद बासमती धान किस्मों में शामिल है।

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