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सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू कीटनाशकों के लाइसेंस की प्रक्रिया हुई बेहद आसान।

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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने घरेलू कीटनाशकों की बिक्री और भंडारण के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को पहले से काफी आसान बना दिया है। सरकार का यह कदम कृषि कारोबार को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद छोटे दुकानदारों, खुदरा विक्रेताओं और कृषि उत्पाद बेचने वाले व्यापारियों को लाइसेंस लेने में कम समय और कम कागजी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ा सुधार

इन सुधारों की समीक्षा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की गई। बैठक में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के “रिफॉर्म एक्सप्रेस” विजन के तहत कृषि क्षेत्र से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेजी से सरल बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य किसानों, व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि कृषि कारोबार को बढ़ावा मिल सके।

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आवेदन प्रक्रिया हुई बेहद आसान, QR Code से मिलेगी पूरी जानकारी

कृषि सचिव अतिश चंद्र ने जानकारी दी कि घरेलू कीटनाशकों के लाइसेंस के लिए आवेदन पत्र को तीन पन्नों से घटाकर केवल एक पन्ने का कर दिया गया है। इसके साथ ही उत्पादों के साथ दिए जाने वाले पारंपरिक कागजी लीफलेट्स को भी समाप्त कर दिया गया है। अब कंपनियां उत्पादों के लेबल पर सीधे QR कोड उपलब्ध कराएंगी, जिसे स्कैन करके उपभोक्ता पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे कागज की बचत होगी और प्रक्रिया अधिक डिजिटल व सुविधाजनक बनेगी।

40 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं को मिलेगा सीधा लाभ

सरकार के इस फैसले से देशभर के 40 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और किराना दुकानदारों को फायदा मिलने की उम्मीद है। मच्छर भगाने वाली मैट, कॉइल, लिक्विड वेपोराइजर और कॉकरोच स्प्रे जैसे घरेलू उत्पाद बेचने वाले छोटे व्यापारियों के लिए अब लाइसेंस प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हो जाएगी। इससे छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी और कृषि व घरेलू उत्पादों का व्यापार और तेज़ी से बढ़ सकेगा।

उर्वरक, आयात-निर्यात और AI प्लेटफॉर्म में भी बड़े बदलाव

बैठक में उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), 1985 के तहत नए उर्वरकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आसान बनाने पर चर्चा हुई। सरकार ने दोहरी मंजूरी प्रणाली खत्म कर केवल केंद्रीय उर्वरक समिति को अनुमोदन का अधिकार दिया है, जिससे कई निर्माताओं को लाभ मिल चुका है। इसके अलावा प्लांट क्वारंटाइन मैनेजमेंट सिस्टम (PQMS) और ICEGATE के डिजिटल एकीकरण से कृषि वस्तुओं के आयात की प्रक्रिया भी आसान हुई है। वहीं “भारत-विस्तार – एआई इन एग्रीकल्चर” प्लेटफॉर्म किसानों के लिए तेजी से उपयोगी साबित हो रहा है, जहां अब तक 44 लाख से अधिक सवाल प्राप्त किए जा चुके हैं।

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