भारत में ग्रीष्मकालीन फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है, जो किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है। 24 अप्रैल 2026 तक कुल रकबा 72.30 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 70.19 लाख हेक्टेयर से 2.11 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों से साफ है कि इस बार खेती का दायरा बढ़ा है और किसानों की भागीदारी भी मजबूत हुई है।
धान का रकबा घटा, फसल पैटर्न में बदलाव
इस साल ग्रीष्मकालीन धान के क्षेत्र में गिरावट देखने को मिली है। धान का रकबा घटकर 30.68 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले साल यह 32.31 लाख हेक्टेयर था। यानी करीब 1.63 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। यह बदलाव संकेत देता है कि किसान अब अन्य फसलों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, खासकर वे फसलें जो कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं।
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दलहन और मोटे अनाज में बढ़त से बढ़ी उम्मीद
दलहन फसलों में इस बार अच्छी बढ़त दर्ज की गई है। कुल रकबा 17.19 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जिसमें मूंग 13.17 लाख हेक्टेयर और उड़द 3.72 लाख हेक्टेयर प्रमुख हैं। इसके अलावा मोटे अनाज (श्री अन्न) का क्षेत्र भी बढ़कर 15.21 लाख हेक्टेयर हो गया है। मक्का 9.50 लाख हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है, जबकि बाजरा, ज्वार और रागी में भी अच्छी हिस्सेदारी देखी गई है।
तिलहन फसलों में तेजी, किसानों की आय में होगा फायदा
तिलहन फसलों का रकबा भी इस साल तेजी से बढ़ा है और 9.21 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 1.50 लाख हेक्टेयर अधिक है। मूंगफली 5.51 लाख हेक्टेयर के साथ प्रमुख फसल बनी हुई है, जबकि तिल और सूरजमुखी का क्षेत्र भी बढ़ा है। कुल मिलाकर फसल पैटर्न में यह बदलाव किसानों की आय बढ़ाने और कम जोखिम वाली खेती की ओर इशारा करता है, जो भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
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