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चीकू की खेती : चीकू की खेती करे और कमाए अधिक से अधिक से लाभ

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चीकू की खेती : इसका मूल स्थान मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका के अन्य देश हैं। चीकू की खेती मुख्यत: भारत में की जाती है। इसे मुख्यत: लेटेक्स के उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है, जिसका उपयोग चूइंग गम तैयार करने के लिए किया जाता है। भारत में इसे मुख्यत: कर्नाटक, तामिलनाडू, केरला, आंध्रा प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में उगाया जाता है। चीकू की खेती 65 हज़ार एकड़ की भूमि पर की जाती है और इसका वार्षिक उत्पादन 5.4 लाख मीट्रिक टन होता है। इसका फल छोटे आकार का होता है जिसमें 3-5 काले चमकदार बीज होते हैं।

चीकू की खेती के लिए मिट्टी

इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है लेकिन अच्छे निकास वाली गहरी जलोढ़, रेतली दोमट और काली मिट्टी चीकू की खेती के लिए उत्तम रहती है। चीकू की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.0-8.0 उपयुक्त होती है। चिकनी मिट्टी और कैल्शियम की उच्च मात्रा युक्त मिट्टी में इसकी खेती ना करें।

चीकू की प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

Kaalipatti: यह किस्म 2011 में जारी की गई है। यह अधिक उपज वाली और अच्छी गुणवत्ता वाली किस्म है। इसके फल अंडाकार और कम बीज वाले होते हैं  जैसे 1-4 बीज प्रति फल में होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 166 किलो प्रति वृक्ष होती है।

Cricket ball: यह किस्म 2011 में जारी की गई है। यह किस्म Calcutta large नाम से प्रसिद्ध है। इसके फल बड़े गोल आकार के, गुद्दा दानेदार होता है । ये फल ज्यादा मीठे नहीं होते। इसकी औसतन पैदावार 157 किलो प्रति वृक्ष होती है।

दूसरे राज्यों की किस्में

Chhatri: यह Kaalipatti किस्म से कम गुणवत्ता वाली किस्म है। यह अधिक उपज वाली किस्म है।

Dhola Diwani: यह किस्म अच्छी गुणवत्ता वाली उपज देती है। इसके फल अंडाकार होते हैं।

Baramasi: यह किस्म उत्तरी भारत में प्रसिद्ध है। इसके फल गोल और मध्यम होते हैं। यह 12 महीने उपज देने वाली किस्म है।

Pot Sapota: पौधे गमले में ही फल देना शुरू कर देते हैं। इसके फल छोटे होते हैं जो कि अंडाकार और शिखर से तीखे होते हैं। फल मीठे और सुगंधित होते हैं।

Calcutta Round, Pala, Vavi Valsa, Pilipatti, Murabba, Baharu, and Gandhevi दूसरे राज्यों में उगाने वाली किस्म है।

चीकू की खेती के लिए ज़मीन की तैयारी

चीकू की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 2-3 बार जोताई करके ज़मीन को समतल करें।

चीकू की खेती के लिए बिजाई

बिजाई का समय

बिजाई मुख्यत: फरवरी से मार्च और अगस्त से अक्तूबर महीने में की जाती है।

फासला

बिजाई के लिए 9 मी. फासले का प्रयोग करें।

बीज की गहराई

1 मीटर गहरे गड्ढे में बिजाई की जाती है।

चीकू की खेती के लिए अंतर-फसलें

सिंचाई की उपलब्धता और जलवायु के आधार पर अनानास और कोकोआ, टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, मटर, कद्दू, केला और पपीता को अंतरफसली के तौर पर उगाया जा सकता है।

chiku ki kheti ke liye खाद

Age of tree (in years)FYM (kg/tree)UREA (gm/tree)SSP (gm/tree)MOP (gm/tree)
1-3 years25220-660300-90075-250
4-6 years50880-13001240-1860340-500
7-9 years751550-20002200-2800600-770
10 years and above10022003100850

दिसंबर से जनवरी महीने में, अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद, फासफोरस और पोटाशियम की मात्रा डालें। नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, पहला भाग मार्च के महीने में और बाकी बची नाइट्रोजन की मात्रा जुलाई से अगस्त महीने में डालें।

चीकू की खेती के लिए खरपतवार नियंत्रण

नदीनों के अंकुरण से पहले शुरूआती 10-12 महीनों में स्टांप 800 मि.ली. या ड्यूरॉन 800 ग्राम प्रति एकड़ में डालें।

चीकू की खेती के लिए सिंचाई

सर्दियों में, 30 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में, 12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। तुपका सिंचाई करें इससे 40 प्रतिशत पानी बचता है। शुरूआती अवस्था में पहले दो वर्षों के दौरान, वृक्ष से 50 सैं.मी. के फासले पर 2 ड्रिपर लगाएं और उसके बाद 5 वर्षों तक वृक्ष से 1 मीटर के फासले पर 4 ड्रिपर लगाएं।

चीकू की खेती के लिए फसल की कटाई

तुड़ाई जुलाई – सितंबर महीने में की जाती है। पर एक बात को ध्यान में रखना चाहिए कि अनपके फलों की तुड़ाई ना करें। तुड़ाई मुख्यत: फलों के हल्के संतरी या आलू रंग के और फलों में कम चिपचिपा दुधिया रंग होने पर की जाती है और इनको वृक्ष से तोड़ना आसान होता है। मुख्यत: 5-10 वर्ष का वृक्ष 250-1000 फल देता है।

चीकू की खेती के लिए कटाई के बाद

तुड़ाई के बाद, छंटाई की जाती है और 7-8 दिनों के लिए 20डिगरी सेल्सियस पर स्टोर किया जाता है। इसकी स्टोरेज क्षमता को 21-25 दिनों तक बढ़ाने के लिए इथाइलिन को निकालकर 5-10 प्रतिशत कार्बनडाईऑक्साइड को डाला जाता है। भंडारण के बाद लकड़ी के बक्सों में पैकिंग की जाती है और लंबी दूरी वाले स्थानों पर भेजा जाता है

source by – apnikheti

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