अफिम नीति 2026-27: जानिए नए लाइसेंस नियम, मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसानों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान,

By
—
On:
Follow Us

​अफिम नीति 2026-27 (Afim Niti 2026-27): मध्यप्रदेश और राजस्थान के अफीम उत्पादक किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने आगामी फसल वर्ष अफीम नीति 2026-27 की नई लाइसेंसिंग नीति (Opium Licensing Policy 2026-27) आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की ओर से जारी इस नई नीति में किसानों के लाइसेंस, उपज के मानक, खेती के रकबे और पात्रता को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनका सीधा फायदा मंदसौर, नीमच और रतलाम समेत देश के अफीम किसानों को मिलेगा।

​नई अफिम नीति 2026-27 के तहत इस बार 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज का मानक सबसे अहम रहने वाला है। वहीं, पहली बार बिना लांसिंग के पोस्त भूसे के उत्पादन के लिए पात्र होने वाले किसानों को पूरे पांच फसल वर्षों तक का लाइसेंस देने का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है।

​800 किलो प्रति हेक्टेयर उपज की शर्त क्यों है अहम?

​नवीनतम अफीम नीति 2026-27 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में जिन किसानों ने बिना लांसिंग के पोस्त भूसे की औसत उपज 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या उससे अधिक जमा कराई है, वे अन्य शर्तें पूरी करने पर वर्ष 2026-27 के लिए अफीम लाइसेंस के पात्र माने जाएंगे।

  • ​प्रतिबंध के नियम: जिन किसानों की उपज 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम रही है, उन्हें इस फसल वर्ष में खेती से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  • ​निलंबित लाइसेंसधारियों को राहत: इसके अलावा, वर्ष 2024-25 में कम उपज के कारण जिन किसानों के लाइसेंस वर्ष 2025-26 के लिए निलंबित (Suspended) कर दिए गए थे, उन्हें भी अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने पर नए फसल वर्ष में लाइसेंस प्राप्त करने का सुनहरा अवसर दिया गया है।

​पात्र किसानों को मिलेगा 5 साल तक का लाइसेंस

​अफिम नीति 2026-27 के तहत सरकार ने किसानों के हित में एक और बड़ा फैसला लिया है। बिना लांसिंग के पोस्त भूसे के उत्पादन के लिए पहली बार पात्र होने वाले किसानों को अब सीधे पांच फसल वर्षों के लिए लाइसेंस जारी किया जा सकता है।

​इसके तहत वर्ष 2026-27 के लिए जारी होने वाला यह लाइसेंस वर्ष 2030-31 तक प्रभावी रह सकता है। हालांकि, किसानों को इसके लिए विभाग के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों या विभागीय निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस रद्द या प्रभावित हो सकता है।

​अगले फसल वर्ष (2027-28) के लिए 900 किलो उपज का लक्ष्य

​केंद्र सरकार ने अभी से ही आगामी फसल वर्ष 2027-28 के लिए भी उपज का कड़ा मानक निर्धारित कर दिया है। आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, अगले वर्ष लाइसेंस की पात्रता हासिल करने के लिए फसल वर्ष 2026-27 के दौरान भूसे के साथ बिना लांस किए गए पोस्त कैप्सूल की औसत उपज 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होना अनिवार्य किया गया है।

​इसके साथ ही, नीति में स्पष्ट किया गया है कि जिन किसानों ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अपनी पूरी खड़ी फसल की जुताई (Ploughing) करा दी थी और जो वर्ष 2026-27 में भी पूरी फसल की जुताई कराते हैं, उन्हें वर्ष 2027-28 के लिए अफीम लाइसेंस का पात्र नहीं माना जाएगा।

​मार्फिन औसत और पट्टे के नए नियम (10 आरी और 5 आरी पट्टा)

​मध्य प्रदेश अफीम नीति 2026-27 के अंतर्गत मार्फिन औसत के आधार पर पट्टों का निर्धारण इस प्रकार किया गया है:

  • ​10 आरी का पट्टा: लुनाई-चिराई पद्धति से अफीम उत्पादन करने वाले जिन किसानों का प्रति हेक्टेयर मार्फिन औसत 4.4 किलोग्राम रहा है, उन्हें नई नीति के तहत 10 आरी के पट्टे दिए जाने का प्रावधान है।
  • ​5 आरी का पट्टा: वहीं, 3.0 से 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच मार्फिन औसत वाले कुछ किसानों के लाइसेंस लुनाई-चिराई श्रेणी से बदलकर सीपीएस (CPS) श्रेणी में स्थानांतरित किए जा सकते हैं, जिन्हें 5 आरी का पट्टा मिलने का प्रावधान है। हालांकि, किसानों की अंतिम पात्रता उनकी श्रेणी और सीबीएन (CBN) की शर्तों के अधीन होगी।

​खेती का क्षेत्र और अतिरिक्त रकबे के नियम

  • ​अधिकतम सीमा: नई नीति के तहत प्रत्येक पात्र किसान को एक भूखंड पर अधिकतम 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती के लिए लाइसेंस दिया जाएगा।
  • ​पट्टे पर जमीन: जरूरत पड़نے पर किसान भाई दूसरे व्यक्ति की भूमि पट्टे पर लेकर भी खेती कर सकते हैं।
  • ​रकबे में छूट: लाइसेंस में स्वीकृत क्षेत्र से पांच प्रतिशत (5%) तक अधिक खेती को निर्धारित नियमों के तहत क्षम्य (Allowable) माना जा सकता है।

​ऑनलाइन जारी होगी पात्र किसानों की सूची

​केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) की नई नीति के तहत पात्र किसानों के नाम सीबीएन की आधिकारिक वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। किसानों को इसकी सूचना मोबाइल SMS, ई-मेल या अन्य डिजिटल माध्यमों से दी जाएगी।

​पात्रता सूची में शामिल किसानों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। मौजूदा लाइसेंसधारियों को सीबीएन कार्यालय में पहले से उपलब्ध दस्तावेज दोबारा जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन यदि विवरण या जानकारी में कोई बदलाव हुआ है, तो संबंधित दस्तावेज अपडेट कराने होंगे।

​अफीम उत्पादक किसानों के लिए क्यों खास है यह नीति?

​Afim Niti 2026-27 में उपज के कड़े मानकों के साथ-साथ लाइसेंस की अवधि को बढ़ाकर 5 साल करने जैसे कदम उठाए गए हैं। नीमच, मंदसौर, रतलाम और चित्तौड़गढ़ सहित देश के सभी प्रमुख अफीम उत्पादक क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहद जरूरी है कि वे अपनी औसत उपज, मार्फिन प्रतिशत और लाइसेंस की स्थिति से जुड़े इन नए नियमों को अच्छी तरह समझ लें।

For Feedback - feedback@example.com

Leave a Comment