ICAR-National Soybean Research Institute ने उत्तरी मैदानी क्षेत्रों के किसानों के लिए सोयाबीन की कई उन्नत किस्मों की अनुशंसा की है। इन किस्मों को खास तौर पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी मैदानी इलाकों, उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों और पूर्वी बिहार की जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। संस्थान का कहना है कि सही किस्मों का चयन करने से किसानों को बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त हो सकती है।
इन राज्यों के किसानों को मिलेगा ज्यादा फायदा
आईसीएआर द्वारा सुझाई गई सोयाबीन किस्में उत्तरी भारत के उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी गई हैं जहां खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सही बीज का चयन फसल की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन उन्नत किस्मों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और ये अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं। इससे किसानों की लागत कम होने के साथ मुनाफा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
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ये हैं सोयाबीन की प्रमुख अनुशंसित किस्में
संस्थान द्वारा अनुशंसित प्रमुख किस्मों में Pusa Soybean 21, NRC 149, Pant Soybean 27, PS 1670, SL 1074, SL 1028, NRC 128, उत्तराखंड ब्लैक सोयाबीन (भट्ट 202), SL 979, SL 955, Pant Soybean 26, PS 1368, PS 24 और VLS 89 शामिल हैं। इन किस्मों को उत्पादन क्षमता, रोग सहनशीलता और बेहतर गुणवत्ता के आधार पर चयनित किया गया है। किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार इनमें से उपयुक्त किस्म का चयन कर सकते हैं।
सही किस्म चुनने से बढ़ सकता है उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान अपने क्षेत्र के अनुसार अनुशंसित सोयाबीन किस्मों का उपयोग करें तो उत्पादन में अच्छा सुधार देखा जा सकता है। इसके साथ ही समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण जैसी तकनीकों को अपनाना भी जरूरी है। अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों का उपयोग करने से फसल में रोग और कीटों का खतरा भी कम होता है। इससे किसानों को बेहतर पैदावार और अधिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों को क्षेत्र के अनुसार किस्म चुनने की सलाह
आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और बारिश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही सोयाबीन की किस्मों का चयन करें। सही बीज और वैज्ञानिक खेती पद्धति अपनाकर किसान खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। आने वाले समय में इन उन्नत किस्मों से उत्तरी भारत के किसानों को सोयाबीन उत्पादन बढ़ाने और आय मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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