केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने बस्तर के विकास को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में जंगल से मिलने वाले उत्पादों और खेती का लाभ सीधे आदिवासी परिवारों तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा। सरकार खेती, डेयरी और सहकारिता आधारित मॉडल को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करना चाहती है। इसके तहत महिलाओं और आदिवासी परिवारों को गाय-भैंस उपलब्ध कराकर डेयरी व्यवसाय से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे गांवों में रोजगार और आय दोनों बढ़ सकें।
सरकारी योजनाओं से जुड़ेगा नक्सल प्रभावित बस्तर
जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अमित शाह ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद की वजह से बस्तर विकास की मुख्यधारा से पीछे रह गया। कई गांवों तक बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं। इतना ही नहीं, कई परिवार सरकारी योजनाओं जैसे राशन कार्ड, मुफ्त अनाज और स्वास्थ्य बीमा के लाभ से भी वंचित रहे। अब सरकार का उद्देश्य इन इलाकों को पूरी तरह विकास की धारा से जोड़ना है ताकि लोगों को बेहतर जीवन और रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
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गांवों में मजबूत होगा डेयरी और सहकारी नेटवर्क
सरकार अब बस्तर में गांव स्तर पर सहकारी समितियों और डेयरी नेटवर्क को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पैक्स समितियों और स्थानीय डेयरी केंद्रों को विकसित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण महिलाएं आसानी से दूध बेच सकेंगी। सहकारी मॉडल के जरिए दूध की खरीद और विपणन की व्यवस्था बेहतर होगी, जिससे ग्रामीण परिवारों की नियमित आय बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर गांवों की आर्थिक स्थिति को तेजी से मजबूत किया जा सकता है।
युवाओं और महिलाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर
अमित शाह ने बताया कि सरकार केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय स्वरोजगार और कौशल विकास पर भी जोर दे रही है। युवाओं को स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों से जोड़कर निजी क्षेत्र और स्वयं के रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं महिलाओं को सहकारी संस्थाओं और डेयरी व्यवसाय से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और आगे इसके लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।
2031 तक विकसित बस्तर बनाने का लक्ष्य
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ नक्सलमुक्त भारत बनाना नहीं बल्कि वर्ष 2031 तक विकसित बस्तर तैयार करना है। उन्होंने “वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा” के माध्यम से लोगों तक 371 सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की भी घोषणा की। इसके अलावा “बस्तर पंडुम” और “बस्तर ओलंपिक” जैसे आयोजनों के जरिए आदिवासी संस्कृति, कला और युवाओं को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि विकास, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करके ही बस्तर को नई दिशा दी जा सकती है।
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