न्यूज़ खेतीबाड़ी टेक्नोलॉजी बिजनेस मनोरंजन ऑटोमोबाइल मंडी भाव स्वास्थ्य

अरहर की इन टॉप 3 उन्नत किस्मों की खेती से किसान हो सकते हैं मालामाल, जानिए बुवाई से लेकर पैदावार तक पूरी जानकारी।

By
On:
Follow Us

देश में इस समय रबी फसलों की खरीद जारी है और साथ ही खरीफ सीजन की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में किसान अब उन फसलों की तलाश कर रहे हैं जिनकी खेती से कम समय में बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिल सके। अरहर की खेती किसानों के लिए हमेशा से लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। यदि किसान इस खरीफ सीजन में पूसा अरहर 16, पूसा अरहर 151 (पूसा श्रीजीता) और पूसा अरहर 2017-1 जैसी उन्नत किस्मों की बुवाई करते हैं, तो बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आय भी प्राप्त कर सकते हैं।

पूसा अरहर 16 दे सकती है कम समय में शानदार उत्पादन

पूसा अरहर 16 किसानों के लिए कम अवधि में तैयार होने वाली बेहतरीन किस्मों में से एक मानी जाती है। यह किस्म लगभग 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और किसानों को 19 से 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि फसल की कटाई जल्दी होने के कारण किसान इसके बाद सरसों, गेहूं और आलू जैसी दूसरी फसलों की खेती भी आसानी से कर सकते हैं। यही वजह है कि यह किस्म किसानों के लिए अतिरिक्त मुनाफा कमाने का अच्छा विकल्प बन रही है।

बासमती बाजार ने बदला रुख! पंजाब से यूपी तक स्थिर हुए भाव, ग्लोबल ट्रेडिंग से मिल रहे तेजी के संकेत।

पूसा अरहर 151 (पूसा श्रीजीता) रोग प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली किस्म

ICAR द्वारा विकसित पूसा अरहर 151, जिसे पूसा श्रीजीता के नाम से भी जाना जाता है, किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह किस्म बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है। यह फसल लगभग 241 दिनों में तैयार होती है और 20.8 से 27.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है। इसमें लगभग 23.6 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जिससे इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। साथ ही यह उकठा (Wilt) रोग के प्रति प्रतिरोधी मानी जाती है, जिससे किसानों को फसल नुकसान का खतरा कम रहता है।

पूसा अरहर 2017-1 कम समय में अधिक पैदावार देने वाली किस्म

पूसा अरहर 2017-1 जल्दी पकने वाली उन्नत किस्मों में शामिल है। यह किस्म खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद मानी जाती है जो कम समय में अधिक उत्पादन लेना चाहते हैं। यह लगभग 122 दिनों में तैयार हो जाती है और 21.2 से 21.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने में सक्षम है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित कई इलाकों के किसानों के लिए यह एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। जल्दी तैयार होने के कारण किसान समय पर अगली फसल की बुवाई भी कर सकते हैं।

जून-जुलाई का समय बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त

Niयदि किसान इस खरीफ सीजन में अरहर की इन उन्नत किस्मों की खेती करना चाहते हैं, तो जून के दूसरे पखवाड़े यानी 15 जून के बाद से जुलाई के पहले सप्ताह तक बुवाई करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मानसून की शुरुआती बारिश मिलने पर फसल का विकास तेजी से होता है और पौधे मजबूत बनते हैं। सही समय पर बुवाई और उचित देखभाल से किसान अरहर की खेती में बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

तरबूज में कब और कितना दें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश? जानें पूरी फर्टिगेशन योजना।

For Feedback - feedback@example.com

Related News

Leave a Comment