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बासमती बाजार ने बदला रुख! पंजाब से यूपी तक स्थिर हुए भाव, ग्लोबल ट्रेडिंग से मिल रहे तेजी के संकेत।

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देश के बासमती बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी नरमी पर अब ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडियों से मिले ताजा भाव बताते हैं कि बासमती की कई किस्मों के दाम अब स्थिर होने लगे हैं। व्यापारियों और निर्यातकों का मानना है कि घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे संकेत आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में किसानों और कारोबारियों की नजर अब इस बात पर है कि बासमती बाजार तेजी की ओर जाएगा या फिर भाव स्थिर रहेंगे।

प्रमुख मंडियों में क्या चल रहे हैं ताजा भाव

सोमवार को जारी बाजार अपडेट के अनुसार पंजाब-हरियाणा लाइन में 1121 स्टीम ग्रेड A+ का भाव करीब 9650 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि 1121 स्टीम ग्रेड A 9600 रुपए और 1121 गोल्डन सेला लगभग 9300 रुपए तक बोला गया। वहीं 1718 स्टीम ग्रेड A+ 9250 रुपए और 1509 स्टीम ग्रेड A+ करीब 9000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा। कुछ किस्मों में हल्की नरमी जरूर देखने को मिली, लेकिन बड़ी गिरावट नहीं आई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि बाजार नीचे के स्तरों पर मजबूत सपोर्ट ले रहा है।

राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में भी बासमती के भाव अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं। राजस्थान में 1718 क्रीमी सेला 8300 रुपए और 1509 क्रीमी सेला 8150 रुपए तक बोला गया। वहीं एमपी लाइन में PB1 गोल्डन सेला 8350 रुपए और PB1 रॉ लगभग 8850 रुपए तक रिपोर्ट किया गया। उत्तर प्रदेश लाइन में 1718 स्टीम में करीब 50 रुपए की तेजी के साथ 9000 रुपए का स्तर देखा गया, जिसे बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

ग्लोबल ट्रेडिंग से मिल रहे मजबूत संकेत

भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती निर्यातक देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ता है। हालिया निर्यात ऑफर के अनुसार 1121 रॉ बासमती का FOB भाव करीब 1150 डॉलर प्रति टन, 1121 स्टीम 1130 डॉलर और 1718 रॉ करीब 1110 डॉलर प्रति टन के आसपास बताया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि वैश्विक खरीदार अभी भी भारतीय बासमती में रुचि बनाए हुए हैं।

मध्य पूर्व, यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों में भारतीय बासमती की मांग लगातार स्थिर बनी हुई है। गर्मियों और त्योहारों के सीजन से पहले कई देशों में स्टॉक भरने की प्रक्रिया भी तेज हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर रहता है तो भारतीय निर्यातकों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है, जिससे घरेलू मिलर्स की खरीदारी बढ़ सकती है और बाजार को मजबूती मिल सकती है।

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किन कारणों से बढ़ सकती है बासमती में तेजी

बाजार जानकारों के मुताबिक इस समय तीन बड़े फैक्टर तेजी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। पहला, किसानों के पास अब सीमित स्टॉक बचा है, जिससे सप्लाई टाइट हो रही है। दूसरा, निर्यात मांग अभी भी बनी हुई है और पुराने ऑर्डर के साथ नई पूछताछ भी जारी हैं। तीसरा, हालिया गिरावट के बाद व्यापारी निचले स्तर पर फिर से स्टॉक बनाने लगे हैं।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में निर्यात ऑर्डर मजबूत बने रहते हैं तो 1121, 1718 और 1509 जैसी प्रमुख किस्मों में सीमित तेजी देखने को मिल सकती है। कई रिपोर्ट्स में भी सप्लाई टाइटनेस और एक्सपोर्ट रिकवरी को बाजार के लिए सकारात्मक बताया गया है।

मंदी का खतरा अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं

हालांकि बाजार में तेजी की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट धीमे पड़ते हैं, डॉलर में तेज उतार-चढ़ाव आता है या बड़े आयातक देश खरीद टालते हैं तो बाजार पर फिर दबाव बन सकता है। इसके अलावा नई फसल सीजन नजदीक आने के कारण बड़े व्यापारी फिलहाल सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को एक साथ पूरी फसल बेचने के बजाय चरणबद्ध बिक्री करनी चाहिए। अच्छी क्वालिटी वाले माल को कुछ समय रोककर रखने पर बेहतर भाव मिलने की संभावना बन सकती है। वहीं व्यापारियों को निर्यात ऑर्डर और बंदरगाह गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

आगे क्या रहेगा बासमती बाजार का ट्रेंड

फिलहाल बाजार में गिरावट थमती नजर आ रही है और कई प्रमुख किस्मों में स्थिरता लौटती दिखाई दे रही है। यदि निर्यात मांग मजबूत बनी रही और घरेलू खरीद बढ़ती है तो आने वाले सप्ताह में बासमती बाजार “स्थिर से मजबूत” रुख दिखा सकता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो बासमती बाजार इस समय अहम मोड़ पर खड़ा है और ग्लोबल ट्रेडिंग का समर्थन मिला तो जल्द ही तेजी की नई चाल शुरू हो सकती है।

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