Wheat Rate: गेहूं के भाव 3000 रूपए प्रति क्विंटल जाएंगे, समर्थन मूल्य पर कितना मिलेगा भाव, देखें खबर

गेहूं के भाव अभी 2000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहे हैं। कहीं-कहीं मंडियों में गेहूं के भाव 2000 रुपए प्रति क्विंटल से कम के भी बने हुए हैं। केंद्र सरकार किसान हित में यदि कुछ निर्णय ले लेती है तो गेहूं के भाव 3000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक के हो जाएंगे आइए जानते हैं यह निर्णय ओ के बारे में एवं विशेषज्ञों से यह भी जानेंगे कि क्या सरकार यह निर्णय लेगी या नहीं?

सर्वप्रथम गेहूं के भाव कम क्यों है यह जानिए

जिस रफ्तार से अन्य उत्पादों Gehun bhav 2023 की महंगाई बढ़ती है, उसके मुकाबले कृषि अनाजों की कीमत नहीं बढ़ पाती है। सरकार गेहूं सहित अन्य कृषि अनाजों के भाव को पूरी तरह नियंत्रित करके रखती है। इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है कीमतें कम होने के कारण किसानों की आर्थिक हालत नहीं सुधर पाती है। सरकार को महंगाई का डर सताता रहता है।

अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान में सहायक प्रोफेसर पूर्णिमा वर्मा ने बताया कि खाद्य मुद्रास्फीति ने पिछले वर्ष हुए उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित नहीं किया, लेकिन इस वर्ष देश के कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों एवं आगामी लोकसभा चुनाव को खाद्य मुद्रास्फीति प्रभावित कर सकती है। इसलिए केंद्र सरकारी सरकार आम चुनाव के पहले कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। क्योंकि उच्च खाद्य कीमतें हमेशा उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाती हैं।

यही कारण है कि सरकार गेहूं Gehun bhav 2023 एवं अन्य कृषि अनाजों के भाव बढ़ने नहीं दे रही है सरकार रिजर्व भंडार से कृषि अनाजों को खुले बाजार में बेचकर भाव पर पूरी तरह नियंत्रण कर रही है। हाल ही में ऐसा देखने को मिला उस दौरान देखने को मिला जब खुले बाजार में गेहूं की कीमत में बढ़ोतरी हुई एवं इसी दौरान रबी फसलों का सीजन शुरू हुआ। ठीक इसी समय केंद्र सरकार ने खुले बाजार में गेहूं Gehun bhav 2023 नीलाम किए। इससे रबी सीजन की शुरुआत से ही गेहूं के भाव गिर गए।

भाव कम होने का प्रमुख कारण निर्यात नहीं होना

भारत ने पिछले साल मई में निर्यात Gehun bhav 2023 रोक दिया था, एक चौंकाने वाला कदम जिसने यूक्रेन में युद्ध के बीच वैश्विक खाद्यान्न की कमी और मुद्रास्फीति की आशंकाओं को हवा दी। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण खेत झुलस गए और में कमी आई, जिससे स्थानीय आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ गई। इसी तरह की चिंताओं ने सरकार को चावल और चीनी के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए प्रेरित किया।हमेशा एक जोखिम होता है कि गर्म लहरें फिर से हो सकती हैं क्योंकि वैश्विक जलवायु परिवर्तन और मौसम अधिक चरम पर हो जाता है।

क्या गेहूं के निर्यात पर से प्रतिबंध हटेगा जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

कृषि मंत्रालय और कुछ व्यापारियों को उम्मीद है कि इस साल देश का गेहूं उत्पादन Gehun bhav 2023 रिकॉर्ड 112 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा। आईटीसी राय ने कहा, ‘कम भंडार के कारण निर्यात प्रतिबंध हटाने की संभावना नहीं है, उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों निर्यात प्रतिबंधों का विस्तार शायद वैश्विक गेहूं बाजार को बढ़ावा देगा, जहां अमेरिका के उत्पादक क्षेत्रों में शुष्क मौसम और यूक्रेनी आपूर्ति में गिरावट के कारण आपूर्ति तंग है,

लिमिटेड का हिस्सा, एक कुकी और आटा निर्माता और गेहूं का एक शीर्ष खरीदार आईटीसी एग्री बिजनेस के डिवीजनल चीफ एक्जीक्यूटिव रजनीकांत राय ने कहा, अगर प्रमुख उत्तरी उत्पादक क्षेत्रों में तापमान मार्च के अंत तक अप्रत्याशित रूप से चढ़ता है, तो उत्पादन जोखिम में है, में ढील देने के किसी भी कदम से घरेलू बाजार को बढ़ावा मिलेगा और सरकार को अपने कल्याण कार्यक्रम के लिए आपूर्ति को फिर से भरना और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदना मुश्किल हो जाएगा।

कुल मिलाकर इन सब बातों का सांप मतलब है कि सरकार के निर्यात प्रतिबंधों को बढ़ा सकती है, जो देश के 1.4 अरब लोगों में से कई के लिए आहार और खाद्य सुरक्षा की कुंजी का एक अनिवार्य हिस्सा है। 2017 के बाद से गरीबों के लिए खाद्य कार्यक्रम की आपूर्ति करने के लिए उपयोग किए जाने वाले गेहूं Gehun bhav 2023 के राज्य के भंडार साल के इस समय के लिए सिकुड़ कम हो गए हैं, जो दर्शाता है कि प्रतिबंधों पर कोई जोखिम नहीं लेने का अच्छा कारण है।

आगे गेहूं के भाव क्या रहेंगे, जानिए

सरकार द्वारा खुले बाजार में गेहूं की नीलामी Gehun bhav 2023 के चलते रबी सीजन की शुरूआत के दौरान यह आशंका जताई जा रही थी कि इस वर्ष गेहूं के भाव समर्थन मूल्य से यानी कि 2125 रुपए प्रति क्विंटल से कम के रह सकते हैं किंतु एन वक्त पर बेमौसम की बारिश एवं ओलावृष्टि के कारण गेहूं सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ इस कारण अच्छे चमकदार गेहूं की डिमांड मार्केट में बढ़ गई है। यही कारण है कि गेहूं के भाव में इस सप्ताह हल्की सी बढ़ोतरी देखने को मिली।व्यापार विशेषज्ञ बताते हैं कि गेहूं के भाव इस वर्ष 2800 रुपए प्रति क्विंटल तक हो सकते हैं। हालांकि यह भाव गेहूं बीज एवं चपाती बनाने के लिए उपयुक्त वैरायटीयों के रहने की उम्मीद है। मंडी नीलाम में लोकवन 1890 से 2634 एवं पूर्णा गेहूं के भाव 3000 रुपए प्रति क्विंटल के रहे।

… तो गेहूं के भाव 3000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक के हो जाएंगे

वर्तमान परिस्थितियां को देखकर आम धारणा बनने लगी है कि यदि गेहूं का निर्यात Gehun bhav 2023 नभी खोले। किंतु आटा, मैदा, रवा आदि उत्पादों का निर्यात खोल दिया जाना चाहिए। स्टॉक लिमिट नहीं लगाई जाएगी, इसकी घोषणा भी की जाए, तो गेहूं के भाव निश्चित तौर पर बढ़ जाएंगे। विशेषज्ञ बताते हैं, कि ऐसी स्थिति में गेहूं के भाव 3000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक किया हो जाएंगे। लेकिन दूसरी दूसरी ओर यह प्रश्न भी है कि क्या एमएसपी पर खरीदी के साथ खाद्य निगम गेहूं Gehun bhav 2023 की बिक्री बंद करेगा या नहीं। अतः वर्तमान गेहूं की ठीक कीमत पर बिके इसका भी इंतजाम हो। खाद्य निगम स्पष्ट घोषणा करें कि प्रत्येक किसान जितनी मात्रा में चाहे एमएसपी कर गेहूं दे सकता है।