जानिए, उड़द की खेती से संबंधित जानकारी
किसान वर्तमान में ऐसी फ़सल की खेती करना चाहते हैं जिससे अधिक लाभ मिल सकें। समय के साथ – साथ खेती करने का तरीका भी बदल गया है। किसान भाई अपने खाली खेतों में जायद के सीजन में कई फसलों की खेती करते हैं। रबी सीजन में गेहूं की कटाई के पश्चात् खाली खेत में मुंग और उड़द की खेती करके अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। मुंग और उड़द दलहन की फसलें हैं। हमारे देश में कई राज्यों में गर्मी के मौसम में उड़द की खेती की जाती है। यदि किसान के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा है तो गर्मी में उड़द की खेती की जा सकती है। मूंग और उड़द की बाजार मांग भी काफी है और इनका अच्छा भाव मिल जाता है। इस स्थिति में किसानों के लिए मूंग और उड़द की खेती फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए किसान भाई उड़द की उन्नत किस्मों का चयन करें जिससे अच्छी उपज प्राप्त हो सके। किसान भाइयों को उड़द की उन्नत किस्मों की जानकारी होना आवश्यक है। आइए, मीडिया 1 द्वारा उड़द की उन्नत 10 किस्मों से संबंधित जानकारी प्राप्त करें।
उड़द की उन्नत 10 किस्में
उड़द की ऐसी बहुत सी उन्नत किस्में हैं जिससे कम लागत में अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। उड़द की उन्नत 10 किस्में इस प्रकार हैं:
(1) आजाद उड़द-2 किस्म
उड़द की आजाद उड़द-2 किस्म उत्तरप्रदेश राज्य के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की आजाद उड़द-2 किस्म के पकने की अवधि लगभग 70 से 75 दिन है। उड़द की आजाद उड़द-2 किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 9 से 10 क्विंटल है।
(2) जवाहर उड़द-2 किस्म
उड़द की जवाहर उड़द-2 किस्म मध्यप्रदेश राज्य के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की जवाहर उड़द-2 किस्म का बीज का आकार मध्यम छोटा, चमकीला और रंग काला होता है। उड़द की इस किस्म के तने पर ही फलियां पास-पास गुच्छों में लगी होती हैं। उड़द की जवाहर उड़द-2 किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 10 से 11 क्विंटल है।
(3) LBG-623 किस्म
उड़द की LBG-623 किस्म आंध्रप्रदेश राज्य के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की LBG-623 किस्म के पकने की अवधि लगभग 69 दिन है। उड़द की LBG-623 किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 10 से 12 क्विंटल है।
(4) IPU-94-1 (IPU-4) किस्म
उड़द की IPU-94-1 (IPU-4) किस्म पश्चिमी उत्तरप्रदेश राज्य के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की IPU-94-1 (IPU-4) किस्म के पकने की अवधि लगभग 85 दिन है। उड़द की IPU-94-1 (IPU-4) किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 11 से 12 क्विंटल है।
(5) IPU-94-1 उत्तरा किस्म
उड़द की IPU-94-1 उत्तरा किस्म के विकास का श्रेय ICAR- भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR), कानपुर को जाता है। उड़द की IPU-94-1 उत्तरा किस्म NEPZ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की IPU-94-1 उत्तरा किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 12 से 14 क्विंटल है।
(6) PDU-1 (बसंत बहार) किस्म
उड़द की PDU-1 (बसंत बहार) किस्म के विकास का श्रेय ICAR- भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR), कानपुर को जाता है। उड़द की PDU-1 (बसंत बहार) किस्म NEPZ और CZ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की PDU-1 (बसंत बहार) किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 9 से 10 क्विंटल है।
(7) TPU-4 किस्म
उड़द की TPU-4 किस्म मध्यप्रदेश और गुजरात राज्य के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की TPU-4 किस्म के पकने की अवधि लगभग 74 दिन है। उड़द की TPU-4 किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 7 से 13 क्विंटल है।
(8) PU-31 किस्म
उड़द की PU-31 किस्म राजस्थान राज्य के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की PU-31 किस्म के दानों का आकार मध्यम होता है। उड़द की PU-31 किस्म के पकने की अवधि लगभग 70 से 80 दिन है। उड़द की PU-31 किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 10 से 12 क्विंटल है।
(9) पंत U-30 किस्म
उड़द की पंत U-30 किस्म पीला मौजेक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की पंत U-30 किस्म के दानों का आकार मध्यम और रंग काला होता है। उड़द की पंत U-30 किस्म के पकने की अवधि लगभग 70 दिन है। उड़द की पंत U-30 किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 10 से 12 क्विंटल है।
(10) T-9 किस्म
उड़द की T-9 किस्म उत्तरप्रदेश के सभी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है। उड़द की T-9 किस्म के पकने की अवधि लगभग 70 से 75 दिन है। उड़द की T-9 किस्म से प्राप्त उत्पादन प्रति हेक्टेयर लगभग 8 से 10 क्विंटल है।
आवश्यक सलाह : इन किस्मों के अतिरिक्त उड़द की अन्य किस्में भी हैं जो अच्छी उपज देती हैं। किसान भाई अपने क्षेत्र की मिट्टी के अनुसार और रोगों की संभावना के आधार पर उड़द की उन्नत किस्मों का चयन करें। किसान भाई नजदीकी कृषि विशेषज्ञों की सलाह के पश्चात् ही अपने क्षेत्र के अनुसार उन्नत किस्मों की बुवाई करें। किसान भाई अपने क्षेत्र के आधार पर प्रमाणित किस्म की बुवाई करें ताकि अच्छी उपज प्राप्त की जा सके। इसके अतिरिक्त खेतों में कृषि अधिकारी की देखरेख में फसल पर उचित कीटनाशक या उर्वरकों का प्रयोग करें।