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सिर्फ 130 दिनों में ही हो जाएंगे मालामाल, इस फसल से बंपर मुनाफा कमाएं किसान

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शकरकंद की खेती : ऐसा माना जाता है कि शकरकंद आलू की ही प्रजाति का एक सदस्य है, लेकिन इसकी खेती बीजों से नहीं, बल्कि कंदों यानी जड़ों से की जाती है. शकरकंद की खेती व्यापारिक तौर पर अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है. इसकी खेती में भूमि उचित जल निकासी वाली होनी चाहिए. कठोर, पथरीली और जल भराव वाली भूमि में इसकी खेती नहीं करें. 

शकरकंद की खेती :भारत की तकरीबन 55 से 60 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है. यहां के ज्यादातर किसान पारंपरिक फसलों की ही खेती करते हैं. लेकिन अब धीरे-धीरे किसान नई तरह की मुनाफा देने वाली फसलों की तरफ तेजी से रूख कर रहे हैं. शकरकंद भी कुछ इसी तरह की फसल है. ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है.

शकरकंद की खेती के लिए ऐसी मिट्टी उपयुक्त

शकरकंद की खेती बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है. कठोर, पथरीली और जल भराव वाली जमीनों पर इसकी खेती करना काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. ध्यान रखें जिस भी भूमि पर शकरकंद की खेती की जा रही है उसका पीएच मान 5.8 से 6.8 के बीच होना चाहिए.तीनों मौसम में की जा सकती है इसकी खेतीइसकी खेती तीनों मौसमों में की जा सकती है, लेकिन बरसात में इसकी खेती करना सबसे लाभदायक है. इस मौसम में शकरकंद के पौधे अच्छी तरह से विकास करते हैं. पौधों की वृद्धि के लिए 25 से 34 डिग्री तक का तापमान सबसे बेहतर है

कैसे करते हैं इसकी खेती

शकरकंद के पौधों की रोपाई नर्सरी में तैयार की गई कटिंग के रूप में की जाती है. इसके लिए पौधों को एक महीने पहले तैयार कर लिया जाता है. इसके लिए नर्सरी में बीजो को लगाकर उसकी बेल को तैयार कर लिया जाता है. फिर खेतों में इसकी रोपाई कर दी जाती है.

इतना है मुनाफा

बता दें कि रोपाई के 120 से 130 दिनों में ही इसके पौधे तैयार हो जाते हैं. जब इसके पौधों पर लगी पत्तियां पीले रंग की दिखाई देने लगें, उस दौरान इसके कंदो की खुदाई कर ली जाती है. अनुमान के मुताबिक, अगर आप एक हेक्टेयर में शकरकंद की खेती करते हैं तो 25 टन तक की पैदावार हासिल कर सकते हैं. बाजार में अगर इसे आप 10 रुपये प्रति किलो में ही बेचेंगे तो भी आराम से सवा लाख रुपये का मुनाफा हासिल कर पाएंगे.

Source by – aajtak

 
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