Sarso Farming: सरसों की खेती के उत्पादन बढ़ाने के आसान तरीके, सरसों की उन्नत किस्में भी देखें

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Sarso Mandi Bhav Today

सरसों की खेती: भारत में सरसों का तेल लगभग सभी घरों में खाद्य तेल के रूप में काम आता है। भारत में सरसों की खेती मुख्य रूप से राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश, उत्‍तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्‍ट्र में की जाती है। सरसों की खेती की खास बात यह है की यह सिंचित और असिंचित, दोनों ही तरह के खेतों में उगाई जा सकती है। सोयाबीन और पाम के बाद सरसों विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा महत्तवपूर्ण तिलहन फसल है। मुख्य तौर पर सरसों के तेल के साथ-साथ सरसों के पत्ते का उपयोग सब्जी बनाने में होता हैं और सरसों की खली भी बनती है जो कि दुधारू पशुओं को खिलाने के काम आती है।

Sarso Farming: सरसों की खेती के उत्पादन बढ़ाने के आसान तरीके, सरसों की उन्नत किस्में भी देखें

Sarso Farming: आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से सरसों की खेती में उत्पादन बढ़ाने के आसान तरीके बताएंगे। इसके अलावा हम आपको सरसों की खेती के दौरान ध्यान रखने वाली बातों की जानकारी भी प्रदान करेंगे और साथ ही आपको सरसों की सर्वश्रेष्ठ किस्मों के नाम भी बताएंगे जो आपको कम लागत और मेहनत में अधिक पैदावार प्रदान करेंगी।

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सरसों की पैदावार बढ़ाने के आसान तरीके और विशेषताएं

• सरसों की फसल सिंचित और असिंचित दोनों ही तरह के खेतों में उगाई जा सकती है।
• सरसों की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस का तापमान जरूरी होता है।
• सरसों की पहली सिंचाई 25 से 30 दिन पर करनी चाहिए।
• सरसों की दूसरी सिंचाई फलियों में दाने भरने की अवस्था में करनी चाहिए।
• सरसों की फसल में फूल आने के समय खेत में सिंचाई नहीं करनी चाहिए।
• सरसों की फसल सही तरीके से पकने के बाद ही उसे निकालना चाहिए।

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