परिशुद्ध खेती या प्रिसिजन फार्मिंग : आलू की खेती के लिए मुनाफे का सौदा , कम लागत और भरपुर पैदावार

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परिशुद्ध खेती (Precision Farming): कृषि क्षेत्र में महत्व

हमारे देश में अधिकांश किसान भाई द्वारा आज भी परंपरागत रूप से खेती की जाती है जिससे किसान भाइयों को अच्छा उत्पादन नहीं मिल पाता है। इसका यह परिणाम यह देखने को मिलता है कि किसानों की आय में वृद्धि नहीं हो पाती है। कुछ किसान भाई आधुनिक तकनीक से खेती करते हैं और अच्छा लाभ कमाते हैं। वर्तमान में किसान भाई परंपरागत तरीकों के स्थान पर आधुनिक विधि से खेती करें जिससे पैदावार में वृद्धि के साथ ही आय में भी वृद्धि हो सके। इसी क्रम में परिशुद्ध खेती या प्रिसिजन फार्मिंग किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प है जिसका प्रयोग कर कम लागत में अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। आइए, परिशुद्ध खेती या प्रिसिजन फार्मिंग और उससे होने वाले लाभ के बारे में जानकारी प्राप्त करें।

प्रिसिजन फार्मिंग (Precision Farming) या परिशुद्ध खेती क्या है?

प्रिसिजन फार्मिंग को परिशुद्ध खेती भी कहते हैं। प्रिसिजन फार्मिंग कृषि की वैज्ञानिक पद्धति है जो कृषि उपज में स्थिरता लाने में सक्षम है। इस पद्धति द्वारा आधुनिक तकनीकी उपकरणों द्वारा सिंचाई, कीटनाशक, उर्वरक, श्रम और भूमि का उचित उपयोग किया जा सकता है और इसके साथ ही पर्यावरण पर हो रहे दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसमें सेंसर की सहायता से फसल, मिट्टी, कीट, रोग, बीमारी और खरपतवार आदि की स्थिति को भलीभांति मापा जा सकता है। इसके अतिरिक्त मिट्टी की स्कैनिंग, ड्रोन कैमरा, हवाई जहाज और उपग्रह की सहायता से फसल में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों पर भी ध्यान में रखा जा सकता है। प्रिसिजन फार्मिंग (Precision Farming) या परिशुद्ध खेती में आधुनिक तकनीकी यंत्रों का अच्छा उपयोग किया जाता है।

परिशुद्ध खेती (Precision Farming): इस तकनीक हेतु आवश्यक यंत्र

प्रिसिजन फार्मिंग या परिशुद्ध खेती को अपनाने से पूर्व उसमें उपयोग किए जाने वाले यंत्रों की जानकारी का ज्ञान होना आवश्यक है। परिशुद्ध खेती (Precision Farming) में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण इस प्रकार हैं –

  • GPS – परिशुद्ध खेती (Precision Farming) में GPS बहुत ही आवश्यक होता है। इसके द्वारा मिट्टी की सही और शुद्ध जानकारी प्राप्त हो जाती है। इसके अतिरिक्त मिट्टी के प्रकार, कीटों की जानकारी और खरपतवारों में वृद्धि आदि की जानकारी को भी प्राप्त किया जा सकता है।
  • GIS – GIS का पूर्ण रूप Geographical Information System है। परिशुद्ध खेती (Precision Farming) में इस यंत्र द्वारा खेतों के आसपास की भौगोलिक स्थिति को जान सकते हैं। GIS सिस्टम द्वारा पूरे खेत की मिट्टी के नमूने को इकट्ठा करने में सहायता मिल जाती है। फसल की सही उत्पादकता को ज्ञात किया जा सकता है। इसके द्वारा फसल के भंडारण में भी सहायता मिल जाती है।
  • सेंसर – परिशुद्ध खेती (Precision Farming) में सेंसर की सहायता से वायु की गति, मिट्टी की आद्रता, वाष्प की मात्रा, तापमान का उचित आकलन ज्ञात किया जा सकता है। सेंसर की सहायता से बिना किसी प्रयोगशाला के फसल की अच्छी पैदावार प्राप्त करने में सहायता मिल जाती है। इसके अतिरिक्त सेंसर द्वारा फसल, रोग और कीटों की जानकारी, खरपतवारों की जानकारी और सूखे की स्थिति में भी सहायता मिल जाती है।
  • उपग्रह – परिशुद्ध खेती (Precision Farming) में उपग्रह की सहायता से किसान भाइयों को खेत और फसल की सटीक जानकारी प्राप्त हो जाती है। खेत और फसल की सटीक जानकारी मिलने से फसल में आवश्यक बातों का सही अनुमान लगाया जा सकता है जिससे किसान भाई पानी, बीज, कीटनाशक और उर्वरक का उचित और सही उपयोग कर सकते हैं।

परिशुद्ध खेती (Precision Farming): हमारे देश के लिए आवश्यक?

परिशुद्ध खेती (Precision Farming): हमारे देश के लिए आवश्यक? यह एक मुख्य प्रश्न है। हमारे देश का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में दूसरा स्थान है और क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में सातवां स्थान है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए इतने बड़े क्षेत्र को अनाज देना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। हमारे देश में अन्न की आपूर्ति करने और आर्थिक रूप से मजबूत होने के लिए कई प्रयास किए जाते हैं। वर्तमान में इस बात का ध्यान रखते हुए परंपरागत खेती की स्थान पर आधुनिक खेती को अपनाना आवश्यक है। विश्व की इतनी बड़ी आबादी क्षेत्र में खाद्यान्न की पूर्ति करने के लिए परिशुद्ध खेती (Precision Farming) बेहतर विकल्प है। इस क्रम में हमारे देश में परिशुद्ध खेती (Precision Farming) तकनीक को अपना कर एक बड़ी समस्या को दूर किया जा सकता है।

परिशुद्ध खेती (Precision Farming): किसानों के लिए फायदेमंद तकनीक

परिशुद्ध खेती (Precision Farming) तकनीक एक आधुनिक करनी है। इस तकनीक द्वारा किसान भाई अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। परिशुद्ध खेती (Precision Farming) तकनीक से खेती संबंधी कार्य में सहायता मिल जाती है जैसे – उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग निश्चित मात्रा में किया जा सकता है। मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखकर उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है जिससे फसल की अच्छी गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होती है और साथ ही उर्वरक और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग में बचत हो जाती है। वर्तमान में कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से पर्यावरण पर दुष्प्रभाव हो रहा है। इस तकनीक द्वारा खरपतवारों को पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डाले बिना ही खत्म किया जा सकता है। इस प्रकार उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग कृषि में कम किया जा सकता है। परिशुद्ध खेती (Precision Farming) तकनीक द्वारा कृषि कार्य में होने वाले खर्च में कमी आती है जैसे – आलू की खेती में एक समान कंद का निर्माण होता है और अधिक उपज प्राप्त हो जाती है। परिशुद्ध खेती (Precision Farming) तकनीक का प्रयोग से किसान भाइयों को लाभ, उत्पादकता और स्थिरता प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

परिशुद्ध खेती (Precision Farming): आलू की खेती में सहायक

परिशुद्ध खेती (Precision Farming) का प्रयोग सभी प्रकार की कृषि कार्यों में किया जा सकता है किंतु आलू की खेती से संबंधित कार्यों में इसका एक अच्छा परिणाम देखने को मिला है। इस तकनीक द्वारा उपज में वृद्धि होने के साथ ही खर्च में कमी आई है जिससे किसान भाइयों की आय में वृद्धि हुई है। विश्व के कई देशों में परिशुद्ध खेती (Precision Farming) तकनीक के द्वारा आलू की उन्नत खेती की जा रही है। परिशुद्ध खेती (Precision Farming) तकनीक के प्रयोग करने से किसान भाइयों को एक और अधिक लाभ प्राप्त होने के साथ खर्च में कमी हो रही है। इस तकनीक का प्रयोग करने से आलू की अच्छी गुणवत्ता और अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार किसान आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही देश को खाद्यान्न आपूर्ति करने में सहायता प्रदान कर रहे हैं।

परिशुद्ध खेती (Precision Farming): महिंद्रा टैक्टर्स के प्लांटिंग मास्टर पोटैटो का कार्य?

आलू की खेती में अधिक खर्च, समय और श्रम की आवश्यकता होती है किंतु महिंद्रा टैक्टर्स के प्लांटिंग मास्टर पोटैटो से यह कार्य सरलता पूर्वक हो सकते हैं। आलू की बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर द्वारा आलू की बुवाई करने पर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है इसकी खासियत इस प्रकार है –

  1. महिंद्रा पोटैटो प्लांटर आलू की बुवाई की एक सटीक मशीन है। महिंद्रा पोटैटो प्लांटर को विकसित करने का श्रेय महिंद्रा और उसके साथ वैश्विक पार्टनर डेल्फ को जाता है। यह भारत की परिस्थितियों के अनुकूल है।
  2. आलू की बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर की खींचने की क्षमता काफी अच्छी है।
  3. आलू की बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर का हाई लेवल सिंगुलेशन आलू के बीजों को खराब नहीं होने देता जिससे आलू की अच्छी गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त होती है। यह एक जगह पर एक ही बीज की बुवाई करता है।
  4. आलू की बुवाई का महिंद्रा पोटैटो प्लांटर मशीन बीजों की बुवाई समान दूरी और गहराई पर करता है जिससे पैदावार अधिक प्राप्त होती है।
  5. आलू बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर का मैकेनिकल वाइब्रेटर से एक स्थान पर एक ही आलू की बुवाई होती है और एडजस्टेबल रीडर द्वारा आलू के कंद तक पर्याप्त हवा और प्रकाश पहुंचने में सहायता मिलती है।
  6. आलू बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर में लगे गहराई नियंत्रण पहिया द्वारा आलू की उचित गहराई पर बुवाई होती है। इसके द्वारा 20 से 60 मिलीमीटर आकार के आलू के बीजों की सरलतापूर्वक बुवाई की जा सकती है।
  7. आलू की बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर का डिजाइन इस प्रकार है कि आलू के बीजों के अनुरूप परिवर्तित किया जा सकता है जैसे कि सही या कटे हुए आलू को सीधी रेखा या जिगजैग पद्धति से किस गहराई पर बुवाई करना है।
  8. प्लाटिंग मास्टर पोटैटो मैं एडवांस्ड मेकैनिज्म मशीन में मूविंग फ्लोर होता है जो रोपण वाले बेल्ट को लगातार आलू प्रदान करता है। इसके प्रयोग से उपज में 25% तक की वृद्धि हो जाती है।
  9. प्लाटिंग मास्टर पोटैटो से बीजों के रोपण का कार्य सटीक होता हैं।
  10. आलू की बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर आलू की बुवाई के समय उसे पर लकीरों का निर्माण कर देता है जिससे कंद के विकास में सहायता मिल जाती है।
  11. आलू बुवाई मशीन महिंद्रा पोटैटो प्लांटर में एक फर्टिलाइजर टैंक होता है जिससे बीजों की बुवाई के समय उर्वरकों का अनुपातिक वितरण किया जा सकता है।
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