नींबू की खेती: नींबू की उन्नत खेती करने के लिए इन बातों का रखें ध्यान, नींबू की किस्में और खेती की प्रक्रिया देखें

अगर आप भी नींबू की खेती से अच्छा लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
नींबू को देखते ही कई लोगों के मन में नींबू पानी, नींबू का आचार, शिकंजी आदि में इसके खट्टे पन का स्वाद आता है. बाजार में जितनी तेजी से इसकी मांग बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से देश के किसान भाई नींबू की खेती (lemon cultivation) को अपना रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसान नींबू को देश का वर्गीय फलों का घर भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर इसकी विभिन्न प्रजातियां सरलता से पाई जाती हैं। जैसे कि- संतरा, मौसमी, नींबू , माल्टा एवं ग्रेप्र फ्रुट आदि. बाजार में इसकी मांग इसलिए सबसे अधिक है क्योंकि नींबू में विटामिन की भरपूर मात्रा पाई जाती है और साथ ही इसमें मौजूद औषधीय गुण (medicinal properties) इसकी मांग को और भी अधिक बढ़ा देते हैं।

नींबू की खेती करके किसान अपनी आर्थिक तंगी को दूर कर सकते हैं, दरअसल, किसान इसकी खेती में कम लागत से अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि नींबू की खेती (lemon cultivation) से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में…

नींबू की किस्में (Lemon Varieties)

भारत में नींबू की अलग-अलग प्रजातियां उगाई जाती हैं। जिनमें उन्नत किस्में कागजी नींबू, रंगपुर नींबू, बारामासी नींबू, चक्रधर नींबू, पी.के.एम.1 नींबू, मैंडरिन ऑरेंज: कुर्ग (कुर्ग और विलीन क्षेत्र), नागपुर (विदर्भ क्षेत्र), दार्जिलिंग (दार्जिलिंग क्षेत्र), खासी (मेघालय क्षेत्र) है।

नींबू के लिए जलवायु

नींबू की खेती से अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए गर्म और नम जलवायु में इसकी खेती करनी चाहिए. बता दें कि 20 से 30 सेंटीग्रेड औसत तापमान इसके लिए उपयुक्त माना जाता है। यह भी देखा गया है कि 75 से 200 सेंटीमीटर बारिश वाले स्थान पर इसकी खेती सबसे अच्छी होती है।

नींबू की खेती के लिए मिट्टी

वैसे तो नींबू की खेती (Nimbu ki kheti) सभी तरह की मिट्टी में की जा सकती है। लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसकी अच्छी उपज बुलई दोमट मिट्टी में ही होती है। बता दें कि इसकी खेती के लिए मिट्टी का PH मान 5.5 से 6.5 तक होना चाहिए।

खेती की तैयारी

नींबू की बागवानी करने से पहले किसान को अपने खेत में गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद उसमें रोपाई के लिए 60 सेमी x 60 सेमी x 60 सेमी के गड्ढे को खोद दें, जिसमें आपको नींबू के पौधों को लगाना है।ध्यान रहे कि पौधे लगाते समय उसमें कंपोस्ट खाद (compost manure) डालें. ताकि वह अच्छे से विकसित हो सके. इस बात का भी ध्यान रखें कि पौधे से पौधे की दूरी 5 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए।

सिंचाई विधि

नींबू की खेती (lemon cultivation) में सिंचाई करना बहुत ही आवश्यक होता है। गर्मी के मौसम में आपको इसकी 10 दिन में सिंचाई करनी होती है और वहीं सर्दी में 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करने की जरूरत होती है। पौधों की स्थिति को देखते हुए आप बारिश के दिनों में भी इसकी सिंचाई कर सकते हैं।

इंटरक्रॉपिंग विधि

किसान भाई नींबू के साथ इंटरक्रॉपिंग भी कर सकते हैं. इसके लिए बेहतर फसलें लोबिया और फ्रेंच बीन्स हैं जो शुरुआती दो से तीन वर्षों में की जा सकती है।इसकी खेती से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को समय-समय पर पौधों में गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट खाद और वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।द रूरल इंडिया के मुताबिक, 3 साल के पौधे में साल में 2 बार फूल आने से पहले 5 किलो/पौधे के हिसाब से वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद देना चाहिए। वहीं अगर आपके नींबू के पौधे 10 वर्ष से अधिक है, तो साल में एक बार 250 ग्राम डीएपी (DAP) 150 ग्राम NPK (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम) जरूर दें।

नींबू के पौधों (lemon plants) में रोग भी बहुत ही तेजी से फैलते हैं। इसलिए किसानों को इनकी देखभाल पर अधिक ध्यान देना चाहिए। जरा भी कीटों व रोगों का प्रकोप दिखाई दें, तो तुरंत उसका इलाज करें।नींबू की फसल (lemon harvest) में लगने वाले प्रमुख रोग- कैंकर, आर्द्र गलन रोग, नींबू का तेल और धीमा उखरा रोग आदि।आमतौर पर नींबू बाजार व मंडी में काफी उच्च दाम पर बिकते हैं. वर्तमान में नींबू की कीमत (price of lemon) 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से भी अधिक बिक रहे हैं। ऐसे में किसान इसकी खेती कर हजारों-लाखों की अच्छी कमाई कर सकते हैं।