Weather Today: मौसम विभाग का बड़ा दावा,एक साथ बनेंगे 3 सिस्टम, देखिए कैसा रहेगा आने वाला मौसम

IMD Issued 3 alerts Weather Forecast Rajasthan: दक्षिणी पश्चिमी हवा की बदले रूख से राजस्थान का मौसम अब पूरी तरह से बदलने को तैयार है। अगले 36 घंटों में इसका असर दिखाई देना लगेगा।

IMD Issued 3 alerts Weather forecast Rajasthan : दक्षिणी पश्चिमी हवा की बदले रूख से राजस्थान का मौसम अब पूरी तरह से बदलने को तैयार है। मौसम विभाग ने प्रदेश में मौसम के बदलाव को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। अगले 36 घंटों में इसका असर दिखाई देना लगेगा। पश्चिमी विक्षोभ का कहीं कहीं आंशिक असर है लेकिन मंगलवार तक यह असर भी कम हो जाएगा। भारतीय मौसम विभाग के जयपुर केंद्र ने बताया है फिलहाल अगले कुछ घंटों में जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, चूरू,सीकर, धौलपुर,करौली जिलों और आसपास के क्षेत्रों मे कहीं-कहीं पर मेघगर्जन के साथ हल्की वर्षा होगी। इसके साथ ही 25-35 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से हवाएं चलेंगी। यह कई क्षेत्रों में अंधड़ का रूप भी अख्तियार कर सकती हैं।

भारतीय मौसम विभाग के जयपुर केंद्र निदेशक और मौसम वैज्ञानिक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि प्रदेश में अब मौसम शुष्क रहेगा। कुछ स्थानों पर दोपहर बाद तेज हवा, बूंदाबांदी की स्थिति रह सकती है। इसके बाद मौसम बिल्कुल शुष्क हो जाएगा और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। मौसम विभाग ने लगातार बदल रहे मौसम को लेकर तीन अलर्ट जारी किया है।

चक्रवात का असर नहीं

अंडमान से चलकर बंगाल की खाड़ी से उठा तूफान राजस्थान में कोई प्रभाव नहीं डाल पाएगा। खाड़ी में इस समय कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके कारण समुद्र में एक चक्रवात उत्पन्न हो गया है। हालांकि इस चक्रवात का असर आसपास के चार राज्यों पर भी रहेगा। इससे तटीय राज्य पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, अंडमान और आंध्रप्रदेश प्रभावित होंगे।

तरबूज का बदला स्वाद, मूंगफली नहीं होगी फलित

बारिश का यह मौसम भले तापमान के लिहाज से मजेदार रहा लेकिन खाघान्न और खेती के लिए यह संकट बन गया है। खेतों में गर्मी न होने के कारण कीट नहीं मरे हैं तो तरबूत में भी लू चलने के कारण मिठास नहीं आई है। ओलावृष्टि सब्जियां खेतों में ही खराब हो गई हैं। किसान नेता आशीष विश्नोई बताते हैं कि यही हाल रहा तो मूंगफली का उत्पादन भी कम हो जाएगा। खरीफ की फसल बुवाई के लिए खेत तैयार हैं लेकिन मौसम की गड़बड़ी से खरीफ फसलों का उत्पादन कम हो सकता है।