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मैंगोस्टीन की खेती : जानें, क्या है मैंगोस्टीन, इसकी खेती से कैसे मिलेगा ज्यादा मुनाफा

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मैंगोस्टीन के पौधों को खेत में लगाने से पहले खेत में गड्ढे तैयार करने होते हैं। गड्ढे बनाने के लिए समतल भूमि में एक मीटर चौड़ा और दो फुट गहरा गड्ढा खेत में तैयार किया जाता है। इन गड्ढों को पंक्ति में तैयार करते है, जिसमें एक पंक्ति से दूसरी पंक्ति के बीच 5 से 6 मीटर के बीच की दूरी रखी जाती है।
इसके बाद तैयार गड्ढों में जैविक और रासायनिक खाद की उचित मात्रा को मिट्टी में मिलाकर भर दिया जाता है। गड्ढों में खाद भरने के बाद गड्ढों की गहरी सिंचाई कर दी जाती है, फिर उन्हें पुलाव करने के लिए ढक देते हैं। इन गड्ढों की तैयारी मैंगोस्टीन के पौधों की रोपाई से एक माह पहले अवश्य कर लेना चाहिए।

मैंगोस्टीन की बुवाई कैसे करें

बीजों के माध्यम मैंगोस्टीन के पौधों की बुवाई थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि इसके असली बीज आसानी से नहीं मिलते इसलिए नर्सरी से ही इसके पौधा खरीदकर लगाना चाहिए। इसके नए पेड़ों को 12 इंच की लंबाई तक पहुंचने में कम से कम दो साल लग सकते हैं। मैंगोस्टीन के पेड़ की रोपाई के बाद इन पेड़ों को फल देने में 7-9 साल तक का समय लग सकता है। हालांकि भारत में इसके पेड़ से फलों प्राप्त करने के दो मौसम होते हैं। इसका पेड़ जुलाई से अक्टूबर तक फल देता है और दूसरी बार अप्रैल-जून के महीनों में फल देता है।

मैंगोस्टीन की खेती करने के लिए उर्वरक प्रबंधन

मैंगोस्टीन के खेत में सामान्य फसलों की तरह ही खाद की जरूरत होती है। पौधे की रोपाई करते समय तैयार गड्ढों में मिट्टी के साथ 15 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद और 100 ग्राम एनपीके खाद की मात्रा को अच्छे से मिलाकर गड्ढों में भर दिया जाता है। खाद की इस मात्रा को पौधे की दो वर्षों की आयु तक देना होता है तथा पौधे के विकास के साथ ही उर्वरक की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए। जब पौधा 15 वर्ष का पूर्ण विकसित हो जाए तो 30 किलो जैविक खाद,3 किलो सुपर फास्फेट खाद, 2 किलो यूरिया और 2 किलो पोटाश की मात्रा को वर्ष में एक से दो बार देना आवश्यक होता है।

मैंगोस्टीन की खेती में पौधों की सिंचाई

मैंगोस्टीन के पौधों को अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है। इसका पूर्ण रूप से विकसित पौधों को एक साल में 7 से 8 बार सिंचाई करना पर्याप्त होता है। इसके पेड़ को पानी देने के लिए खेत में थाला बनाया जाता है। इसके थाले को पौधे के तने के चारों ओर दो फ़ीट की दूरी पर गोल घेरा करके बनाया जाता है। इस घेरा की चौड़ाई दो फ़ीट तक की होनी चाहिए। सर्दियों के सीजन में 10 से 15 दिन में इसके पेड़ो की सिंचाई की जाती है तथा गर्मी के सीजन में 5 से 6 दिन में एक बार पानी देना चाहिए। यदि आपने बलुई दोमट मिट्टी में पौधों की रोपाई की है, तो इसके पौधे को अधिक पानी की जरूरत होती है। इसलिए गर्मियों में पौधों को सप्ताह में दो बार पानी देना पर्याप्त होता है। बारिश के मौसम में समय से वर्षा ना होने पर ही पौधों में सिंचाई करना चाहिए।

मैंगोस्टीन के पौधों में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें

मैंगोस्टीन के पौधों में खरपतवार नियंत्रण के लिए प्राकृतिक तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए। मैंगोस्टीन के पौधे की रोपाई के तक़रीबन 20 से 25 दिन बाद खेत में हल्की निराई-गुड़ाई अवश्य कर दें। पूरे तरीके से विकसित पौधों को प्रति वर्ष केवल 3 से 4 गुड़ाई की जरूरत होती है।

मैंगोस्टीन के फल का उत्पादन व लाभ

मैंगोस्टीन की उन्नत किस्मों का एक पेड़ से औसतन 100 से 110 किलो ग्राम का वार्षिक उत्पादन प्राप्त हो जाता है। इसकी एक एकड़ की खेती में तक़रीबन 300 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। जिनसे 20 टन के आसपास उत्पादन आसानी से मिल जाता है। मैंगोस्टीन का बाज़ार में थोक भाव भी अच्छा होता है। इस हिसाब से एक एकड़ के खेत में मैंगोस्टीन की एक बार की फसल से किसान भाई 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से कर सकते हैं।

source by – tractorguru

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